Constitution : पाकिस्तान का संविधान बनाने वाला बाद में कैसे पछताया
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भारत की देखादेखी पाकिस्तान ने अपना संविधान (Constitution) बनाने का प्रयास किया। इसके लिए उसने एक बड़े अंग्रेज नाम को चुना। हालांकि पाकिस्तान का संविधान और उसे बनाने वाले, दोनों ही फ्लॉप हुए। अंबेडकर जयंती पर विशेष।
जब भारत का संविधान (Indian Constitution) बना रहा था, उस समय आइवर जेनिंग्स (Ivor Jennings) का नाम चर्चा में था। जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि वही संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बनें। लेकिन महात्मा गांधी की राय से डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) को यह जिम्मेदारी मिली।
आइवर जेनिंग्स एक ब्रिटिश संविधान विशेषज्ञ (constitutional expert) थे। उनका जन्म 1903 में हुआ था और वह यूनाइटेड किंगडम के जाने-माने शिक्षाविद् और कानूनविद् थे। वह ब्रिटिश संविधान और कामन लॉ पर गहरी पकड़ रखते थे। भारत में तो उनको मौका नहीं मिला, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें जरूर बुलाया।
पाकिस्तान का संविधान और जेनिंग्स (Constitution of Pakistan)
1947 में पाकिस्तान नया-नया आजाद हुआ था और उसे भी अपना संविधान बनाना था। वहां के नेताओं को लगा कि एक विदेशी विशेषज्ञ की सलाह से शायद सब कुछ बेहतर और व्यवस्थित हो जाएगा। यहीं पर आइवर जेनिंग्स की एंट्री होती है।
1950 के दशक में जेनिंग्स को पाकिस्तान सरकार ने संवैधानिक सलाहकार (constitutional advisor) नियुक्त किया। उन्होंने वहां के नेताओं को संविधान (Constitution) बनाने में गाइड किया, मॉडल सुझाए, और यह समझाने की कोशिश की कि ब्रिटेन जैसे देशों में लोकतंत्र कैसे चलता है।
लेकिन समस्या ये थी कि पाकिस्तान की अपनी परिस्थितियां थीं - न सामाजिक संरचना ब्रिटेन जैसी थी, न राजनीतिक समझदारी। जेनिंग्स ने कोशिश तो की, लेकिन उनके सुझाए मॉडल पाकिस्तान की जमीन पर फिट नहीं बैठे।
जेनिंग्स की किताब और आलोचना
1957 में उन्होंने एक किताब लिखी — Constitutional Problems in Pakistan। इसमें उन्होंने खुलकर लिखा कि पाकिस्तान में संविधान (Constitution) बनाना आसान नहीं है। वहां बार-बार असेंबली टूट रही थी, नेताओं में एकता नहीं थी, और फौज की दखलअंदाजी बढ़ती जा रही थी।
जेनिंग्स ने माना कि संविधान बनाना सिर्फ कानून की किताब लिखना नहीं है। यह एक सामाजिक प्रक्रिया है, जो तब ही सफल होती है जब उसमें देश की जरूरतों और सोच का सम्मान किया जाए।
पाकिस्तान ने पहला संविधान (Constitution) 1956 में अपनाया, लेकिन वह सिर्फ दो साल चला। 1958 में फौजी तख्तापलट हुआ और संविधान को रद्द कर दिया गया। इसके बाद से पाकिस्तान में संविधान बार-बार बदला गया, कभी सस्पेंड हुआ, कभी मार्शल लॉ लगा, और आज तक वहां की संवैधानिक स्थिरता सवालों के घेरे में है।
दूसरी तरफ, भारत ने डॉक्टर आंबेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) की अध्यक्षता में जो संविधान तैयार किया, वह न सिर्फ टिकाऊ निकला, बल्कि उसने देश को एक मजबूत लोकतंत्र में बदल दिया। हां, 1975 का आपातकाल एक काला अध्याय था, लेकिन संविधान ने खुद को सही किया, लोकतंत्र को बचाए रखा।
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