Independence : क्रिसमस पर ही मिल जाती आजादी, लेकिन...
Vellore Revolt : बस 5 मिनट से बच गए थे अंग्रेज वरना वेल्लोर विद्रोह से मिल जाती आजादी! अंग्रेजों से आजादी (Independence) हासिल करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अनगिनत बलिदान दिए हैं। 15 अगस्त 1947 की तारीख उसी बलिदान का नतीजा है। लेकिन यह तारीख पहले भी आ सकती थी। uplive24.com पर Independence Day से जुड़ा इतिहास का एक किस्सा। भारत की आजादी (Independence) के लिए दो तरह से लड़ाई चल रही थी। एक रास्ता था अहिंसक, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) कर रहे थे। बापू का मानना था कि अहिंसा में बहुत ताकत होती है और इसके माध्यम से भी अंग्रेजों भारत से भगाया जा सकता है। दूसरा रास्ता सशस्त्र क्रांति का था। इसकी कमान उन युवाओं के हाथो में थी, जिन्हें लगता था कि आजादी (Independence) अहिंसा से नहीं मिल सकती। अंग्रेजों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना होगा। सशस्त्र क्रांतिकारियों की चर्चा काफी कम होती है। लेकिन, अगर तकदीर ने थोड़ा-सा भी साथ दिया होता, तो शायद भारत को आजाद कराने का सेहरा सशस्त्र क्रांतिकारियों के सिर पर ही बंधता। उन्होंने दो ऐसी कोशिशें कीं, जो सफल होने के बेहद करीब थीं।...