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क्या भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में आज भी धड़कता है श्रीकृष्ण का दिल?

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  भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां हर 12 साल में क्यों बदली जाती हैं, क्या है ब्रह्म पदार्थ, क्यों नहीं सुनाई देती समुद्र की आवाज और क्यों खास है मंदिर की रसोई? जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रहस्यों के बारे में जानिए uplive24.com पर। ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है। हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन यह मंदिर केवल रथयात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण भी प्रसिद्ध है। मूर्तियों के बदलने की परंपरा से लेकर रहस्यमयी 'ब्रह्म पदार्थ', समुद्र की आवाज और दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में से एक तक, जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं (Jagannath Puri Temple mysteries)। श्रीराम के जन्म पर क्या कहता है इतिहास? रथयात्रा की शुरुआत कैसे हुई? धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने नगर भ्रमण की इच्छा जताई। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बड़े भाई बलभद्र उन्हें ...

जब भारतीय फुटबॉल से डरने लगा था यूरोप

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Golden Era of Indian Football : आज भारतीयों की जुबान पर मेसी और रोनाल्डो हैं। लोगों ने विदेशी टीमों में से अपनी टीमें चुन रखी हैं। लेकिन एक समय भारतीय फुटबॉल टीम सबकी चहेती थी। uplive24.com पर स्पेशल रिपोर्ट। Golden Era of Indian Football : जब भी फुटबॉल विश्व कप शुरू होता है, तो भारत में यह सवाल उठने लगता है कि हमारी टीम क्यों नहीं? कब तक अर्जेंटीना या ब्राजील में भारतीय अपनी टीम और पसंदीदा खिलाड़ी चुनते रहेंगे? हालांकि एक वक्त देश फुटबॉल की बड़ी उभरती ताकत था। बहुत कम लोग जानते हैं कि तब भारतीय फुटबॉल टीम को एशिया की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता था। भारत को एशियाई फुटबॉल का ब्राजील तक कहा जाने लगा था। आज यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि भारत ने 1951 और 1962 के एशियाई खेलों में फुटबॉल का स्वर्ण पदक जीता था। 1951 में दिल्ली में भारत ने फाइनल में ईरान को हराया, जबकि 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों में दक्षिण कोरिया को मात देकर दूसरा गोल्ड अपने नाम किया (Golden Era of Indian Football)। 1962 के टूर्नामेंट में भारत ने जापान जैसी मजबूत टीम को भी हराया था। आज यही जापान, दक्षिण कोरिया और ईरान लगात...

जब फुटबॉल ने करा दी दो देशों में जंग

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  1969 में फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर के दौरान अल साल्वाडोर और होंडुरास के बीच खेला गया फुटबॉल मैच इतिहास की सबसे चर्चित जंग का कारण बना। जानिए 100 घंटे के फुटबॉल वॉर की पूरी कहानी uplive24.com पर। History of football war : बात जब फुटबॉल के लिए दीवानगी की हो, तो इसकी कोई हद नहीं। लेकिन यह जुनून कभी-कभी इतना खतरनाक भी हो सकता है कि देशों के रिश्ते तक टूट जाएं। इतिहास में एक ऐसी ही घटना दर्ज है, जब एक फुटबॉल मैच के बाद दो पड़ोसी देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। यह संघर्ष 'फुटबॉल वॉर' या '100 घंटे की जंग' के नाम से जाना जाता है (History of football war)। यह युद्ध जुलाई 1969 में मध्य अमेरिकी देशों अल साल्वाडोर (El Salvador) और होंडुरास (Honduras) के बीच हुआ था। क्या ट्रंप के कहने पर काम कर रहा फीफा? क्या सचमुच फुटबॉल मैच की वजह से हुआ था युद्ध? इतिहासकार मानते हैं कि युद्ध की असली वजह केवल फुटबॉल नहीं थी। दोनों देशों के बीच वर्षों से भूमि विवाद, आव्रजन और आर्थिक असमानता को लेकर तनाव चल रहा था। फुटबॉल मैच वह चिंगारी साबित हुआ जिसने पहले से सुलग रहे विवाद को खुली जंग में बदल दिया ...

इस तरह खोजा गया केप वर्डे और फिर बना गुलामों का सबसे बड़ा केंद्र

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फीफा फुटबॉल विश्व कप (Fifa World Cup) में केप वर्डे ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। इसके पहले कई लोगों ने इस देश का नाम तक नहीं सुना था। uplive24.com पर जानिए इस देश का इतिहास। History of Cape Verde : अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच बसा केप वर्डे आज अफ्रीका के सबसे शांत, स्थिर और लोकतांत्रिक देशों में गिना जाता है। लेकिन इस छोटे से द्वीपीय देश की कहानी संघर्ष, गुलामी, अकाल, उपनिवेशवाद और आजादी के लंबे सफर से होकर गुजरती है। कभी यह द्वीप ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार का बड़ा केंद्र था। यहां राजनीतिक कैदियों को निर्वासित किया जाता था और धार्मिक उत्पीड़न से भागे लोगों को शरण भी मिलती थी।  इतिहासकारों के अनुसार 1456 में जब पुर्तगाली नाविक यहां पहुंचे तो उन्होंने इन द्वीपों को पूरी तरह निर्जन बताया। अब तक ऐसा कोई पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि यहां पहले कोई मानव बस्ती थी (History of Cape Verde)। उस समय पुर्तगाल नई समुद्री व्यापारिक राहों की तलाश में था। यूरोप से भारत और पश्चिमी अफ्रीका तक पहुंचने के लिए उसे नया समुद्री मार्ग चाहिए था, क्योंकि मसालों, सोने और...

क्या यीशू को सूली पर चढ़ाते समय भूकंप आया था?

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  जीसस को जब सूली पर चढ़ाया गया, तब येरुशलम की धरती कांप उठी थी। बाइबिल में इस घटना का जिक्र मिलता है। इतिहासकारों ने रिसर्च के आधार पर क्या नतीजा निकाला है, uplive24.com पर जानिए। Was there earthquake when Jesus died : यीशु मसीह की सूली पर चढ़ाए जाने की घटना इतिहास और आस्था के बीच खड़ी एक ऐसी कहानी है, जिस पर सदियों से बहस होती रही है। खासकर येरुशलम में उस दिन भूकंप आने का दावा इसे और रहस्यमयी बना देता है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ धार्मिक वर्णन है या इसके पीछे कोई वास्तविक प्राकृतिक घटना भी छिपी हो सकती है? New Testament के अनुसार, जब यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया और उन्होंने अंतिम सांस ली, तो अचानक धरती कांप उठी। इस घटना का सबसे स्पष्ट वर्णन Gospel of Matthew में मिलता है, जहां लिखा है कि धरती हिली, चट्टानें टूट गईं और मंदिर का पर्दा फट गया। यह दृश्य इतना असाधारण बताया गया कि इसे केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक दिव्य संकेत की तरह प्रस्तुत किया गया (Was there earthquake when Jesus died)।  दिलचस्प बात यह है कि अन्य सुसमाचारों जैसे Gospel of Mark, Gospel of Luke और Gospe...

किचन वेस्ट से घर में ऐसे बनाएं कम्पोस्ट खाद

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How to make compost from kitchen waste : किचन से निकले वेस्ट यानी फल-सब्जियों के छीलके, सूखे पत्तों, बचे हुए खराब हो चुके खराब भोजन से भी टेरेस गार्डेन के लिए खाद तैयार की जा सकती है। uplive24.com पर जानिए घर में कम्पोस्ट बनाने का तरीका। How to make compost from kitchen waste : आज दुनिया भर में खाने की भारी बर्बादी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार हर साल अरबों टन भोजन कूड़े में फेंक दिया जाता है। यह केवल भोजन की बर्बादी नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। जब खाने का कचरा लैंडफिल में पहुंचता है, तो वहां ऑक्सीजन की कमी के कारण यह सड़ने लगता है और मीथेन गैस पैदा करता है। यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कई गुना अधिक खतरनाक मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इस समस्या का एक बड़ा समाधान हमारे अपने घरों में छिपा हुआ है। किचन से निकलने वाले फल और सब्जियों के छिलके, चायपत्ती, कॉफी ग्राउंड्स और अन्य जैविक कचरे को फेंकने के बजाय खाद में बदला जा सकता है। यही प्रक्रिया होम कम्पोस्टिंग (Home Composting) कहलाती है। यह भी पढ़ें : Gardening Tips : गर्मी...

आबादी बढ़ाने के लिए पैसे क्यों दे रहीं सरकारें?

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  आंध्र प्रदेश में घटती जन्मदर से सरकार चिंतित है। uplive24.com पर जानिए क्यों दुनिया के कई देश कम बच्चे पैदा होने की समस्या से जूझ रहे हैं और चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी कैसे उसके लिए बड़ी चुनौती बन गई। एक समय था जब दुनिया के कई देश बढ़ती आबादी से परेशान थे। सरकारें लोगों से कम बच्चे पैदा करने की अपील करती थीं। भारत में भी 'हम दो, हमारे दो' जैसे अभियान चलाए गए। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया के कई देश घटती जन्मदर और बूढ़ी होती आबादी से चिंतित हैं। भारत के कुछ राज्य भी अब इसी समस्या का सामना करने लगे हैं। इसी चिंता के बीच आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने में तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर आर्थिक प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है। सरकार तीसरे बच्चे पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने की तैयारी कर रही है। यह फैसला सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक कारणों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है (Why governments giving money to increase population)। UP Live News Mansoon Kab Aayega : यह बढ़ती गर्मी मानसून के लिए क्यों अच्छी है? आखिर क्यों घट रही है जन...