Mughal History : भारतीय महिलाओं का वह गहना जिसे देखकर पीछे हट जाते थे मुगल
https://uplive24.com/how-dholna-save-women-from-mughals/ भारतीय संस्कृति में सुहागिनों के आभूषणों का एक विशेष स्थान है, और उनमें से एक है ढोलना, जिसकी परंपरा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में विशेष रूप से देखी जाती है। विवाह की रस्में इस गहने के बिना अधूरी मानी जाती हैं। मान्यता है कि यह केवल श्रृंगार का प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक जरूरत से उपजी परंपरा भी है। मुगल काल (Mughal History) के दौरान, जब आक्रमणों की मार भारतीय समाज पर गहरी पड़ रही थी, तब अनेक परंपराओं का जन्म हुआ। कहा जाता है कि विवाह के बाद जब कन्या की विदाई होती, तो रास्ते में मुगल सैनिक नवविवाहिताओं को अगवा कर लेते थे। इस अत्याचार से बचने के लिए एक युक्ति निकाली गई - ढोलना पहनने की परंपरा। इस आभूषण को एक विशेष अर्थ और रूप दिया गया। यह अफवाह फैलाई गई कि इस ढोल के आकार के गहने में सूअर के बाल भरे जाते हैं। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, सूअर को अपवित्र माना जाता था, जिससे मुगल सैनिक इन स्त्रियों को छूने से भी कतराते। इस प्रकार, ढोलना केवल एक गहना नहीं, बल्कि आत्मरक्षा का प्रतीक बन गया। आज भी, विवाह की परंपरा में...