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Independence : क्रिसमस पर ही मिल जाती आजादी, लेकिन...

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  Vellore Revolt : बस 5 मिनट से बच गए थे अंग्रेज वरना वेल्लोर विद्रोह से मिल जाती आजादी! अंग्रेजों से आजादी (Independence) हासिल करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अनगिनत बलिदान दिए हैं। 15 अगस्त 1947 की तारीख उसी बलिदान का नतीजा है। लेकिन यह तारीख पहले भी आ सकती थी। uplive24.com पर Independence Day से जुड़ा इतिहास का एक किस्सा। भारत की आजादी (Independence) के लिए दो तरह से लड़ाई चल रही थी। एक रास्ता था अहिंसक, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) कर रहे थे। बापू का मानना था कि अहिंसा में बहुत ताकत होती है और इसके माध्यम से भी अंग्रेजों भारत से भगाया जा सकता है। दूसरा रास्ता सशस्त्र क्रांति का था। इसकी कमान उन युवाओं के हाथो में थी, जिन्हें लगता था कि आजादी (Independence) अहिंसा से नहीं मिल सकती। अंग्रेजों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना होगा। सशस्त्र क्रांतिकारियों की चर्चा काफी कम होती है। लेकिन, अगर तकदीर ने थोड़ा-सा भी साथ दिया होता, तो शायद भारत को आजाद कराने का सेहरा सशस्त्र क्रांतिकारियों के सिर पर ही बंधता। उन्होंने दो ऐसी कोशिशें कीं, जो सफल होने के बेहद करीब थीं।...

Vellore Revolt : क्या हुआ था वेल्लोर में, जिसे मानते हैं आजादी की पहली जंंग

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  uplive24.com पर जानिए 1806 के वेल्लोर विद्रोह (Vellore Revolt) की पूरी कहानी। कैसे धार्मिक अपमान और ड्रेस कोड ने भारत की आजादी की पहली सशस्त्र बगावत को जन्म दिया, और कैसे अंग्रेजों ने इसे बेरहमी से कुचला। History of Nepal : मुगलों से कैसे आजाद रहा नेपाल? भारत की आजादी की पहली लड़ाई 1857 के स्वाधीनता संग्राम को माना जाता है। यह बड़े स्तर पर आजादी की पहली कोशिश थी। इससे पहले भी अंग्रेजों से आजादी छीनने के प्रयास हो चुके थे, लेकिन वे इतिहास के पन्नों में कहीं खो से गए। इनमें सबसे खूंखार था 1806 का वेल्लोर विद्रोह (Vellore Revolt)। यह गुलामी के खिलाफ भारत की पहली जंग भी मानी जाती है।  1857 की तरह इस बगावत की वजह भी धार्मिक और सांस्कृतिक थी। ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीय सिपाहियों के लिए एक ड्रेस कोड लागू किया। इसके मुताबिक, उन्हें किसी भी तरह के जातिसूचक प्रतीक दिखाने की अनुमति नहीं थी, जैसे कि हिंदुओं को टीका-तिलक लगाने और मुस्लिमों को दाढ़ी रखने की। साथ ही, मूंछों को भी एक पैमाइश के हिसाब से रखना था। इसका मकसद था, सेना को एक समान दिखाना। जाहिर तौर पर ये काफी सीधे और सरल बदलाव थे। ल...

Potato : हमारा आलू कभी टमाटर था, संयोग से पैदा हुआ, आदिवासियों ने बचाया

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  https://uplive24.com/how-potato-was-born-from-tomato/ हमारे रोजमर्रा के खाने में शामिल एक सीधा-साधा आलू (Potato), दरअसल एक बेहद रोचक और पुरानी जैविक कहानी का हिस्सा है। नई वैज्ञानिक खोजों ने इस बात पर से पर्दा उठा दिया है कि आलू की शुरुआत कैसे हुई। हर भारतीय रसोई में आलू की एक खास जगह है। चाहे सब्जी हो, पराठा हो या समोसा - आलू न हो तो स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये आलू आखिर आया कहां से? क्या ये कोई प्राकृतिक सब्जी है या किसी अनोखी कहानी का नतीजा? वैज्ञानिकों ने अब इसका रहस्य सुलझा लिया है। और जवाब चौंकाने वाला है - आलू दरअसल टमाटर और एक जंगली पौधे के 'प्राकृतिक मेल' से बना है! आलू की पैदाइश करीब 9 मिलियन साल पहले हुई थी, वो भी एक अनोखे 'प्राकृतिक शादी' (Natural Interbreeding) के कारण - जब एक प्राचीन टमाटर पौधा (Ancient Tomato Plant) और एक जंगली आलू जैसा पौधा (S. etuberosum) आपस में मिले यानी प्राकृतिक रूप से एक-दूसरे से परागण हो गया। लेकिन उस समय ये पौधे वे नहीं थे जिन्हें हम आज के टमाटर या आलू के रूप में जानते हैं। टमाटर का पौधा उस समय भी टमाट...

Uttarakhand Disaster : उत्तराखंड की वह आपदा, जिसने भागीरथी की धारा बदल दी

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https://uplive24.com/uttarakhand-disaster-which-changed-the-course-of-bhagirathi/ उत्तरकाशी के धराली में प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दी है। हाल के बरसों में उत्तराखंड (Uttarakhand Disaster) में इस तरह की आपदाएं लगातार आ रही हैं। uplive24.com पर एक्सपर्ट बता रहे हैं इसकी वजह। डॉ. बृजेश सती  Uttarakhand Disaster : हाल के वर्षों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं (Natural disasters in Uttarakhand and Himachal) की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। विशेष रूप से बादल फटने (cloudburst in Himalayas) की घटनाएं मानसून के दौरान आम हो गई हैं। ये न सिर्फ भारी जन-धन की हानि का कारण बन रही हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन (climate change) और पर्यावरणीय असंतुलन की भी गंभीर चेतावनी दे रही हैं। मंगलवार को उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में खीरगंगा नदी के ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने (Uttarakhand Disaster) के कारण अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी। मलबे की तेज़ लहरों ने कई घर, दुकानें और सड़कें बहा दीं। एक तरह से इस आपदा ने धराली गांव का भूगोल और इतिहास दोनों बदल डाले। दरअसल, पहाड़ो...

Mohammed Siraj : थोड़ा रोनाल्डो और ज्यादा विराट, ऐसे बने मोहम्मद सिराज

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https://uplive24.com/mohammed-siraj-success-story-how-virat-inspires-him/ वह मैदान पर विराट कोहली वाली आक्रामकता लेकर आते हैं और गेंदबाजी में बुमराह वाली सटीकता। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्होंने सबसे ज्यादा ओवर डाले और सबसे अधिक विकेट लिए। uplive24.com पर जानिए मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) के जज्बे और जुनून की कहानी। हैदराबाद की गलियों से निकलकर ओवल की पिच तक, मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि एक बेटे, एक मां की दुआ, और एक पिता के अधूरे सपने को जीने की कहानी है।  पांचवें टेस्ट मैच (IND vs ENG 5th Test) में जब सिराज (Mohammed Siraj) ने मैच जिताने वाला आखिरी विकेट लिया, तो इंग्लैंड का ड्रेसिंग रूम मायूस जरूर हुआ, लेकिन कोच ब्रेंडन मैकुलम ने सिराज के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा, 'हम निराश जरूर हैं, लेकिन सिराज के संघर्ष और जुझारूपन को देखकर सम्मान भी है।' सिराज को टीम इंडिया के साथी खिलाड़ी प्यार से मियां भाई कहते हैं। उनके लहजे में वह हैदराबादी टच है, जो कानों में मिसरी-सा घोल देता है, लेकिन जब हाथ में गेंद होती है, वही हमेशा मु...

Shibu Soren : बचपन का संघर्ष, जवानी के आंदोलन - ऐसे दिशोम गुरु बने शिबू सोरेन

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  https://uplive24.com/how-shibu-soren-become-dishom-guru/ शिबू सोरेन (Shibu Soren) का जाना किसी एक राज्य के लिए नहीं, पूरे देश के लिए क्षति है। वह आदिवासी समाज की सबसे बुलंद आवाज थे। uplive24.com पर जानिए उनके संघर्ष की गाथा। झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के सबसे सशक्त स्तंभ, दिशोम गुरु शिबू सोरेन (Shibu Soren) का आज निधन हो गया। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 81 वर्ष के थे और पिछले कुछ महीनों से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने की। 11 जनवरी 1944, हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन (Shibu Soren) का बचपन संघर्षों में बीता। जब वह 13-14 साल के थे, तभी महाजनों द्वारा उनके पिता सोबरन मांझी की हत्या कर दी गई। इस दर्दनाक घटना ने शिबू को आदिवासी अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने महाजनी शोषण, भूमि हथियाने, और आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्गों के हक-हुकूक के लिए आंदोलनों की शुरुआत की। 1970 के दशक में शिबू सोरेन की पहचान एक समाज सु...

Badminton : भारत का पूना गेम कैसे बन गया आज का बैडमिंटन?

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https://uplive24.com/history-of-badminton-from-poona-to-badminton-house/ कभी सोचा है कि बैडमिंटन (Badminton) जैसा एलीगेंट खेल भारत की धरती से निकला होगा? जी हां! और इसका पहला नाम था - पूना (Poona Game)। uplive24.com के साथ चलिए एक छोटी-सी यात्रा पर, जहां हम जानेंगे कि कैसे यह भारतीय खेल पूना से बन गया बैडमिंटन। बैडमिंटन (Badminton) आज जिस रूप में हमारे सामने है, वहां तक पहुंचने के लिए उसने लंबी यात्रा की है। कई सदियों से गुजरा, कई समुद्र लांघे, भाषाओं की दीवार को तोड़ा।  इस खेल की जड़ें बहुत पुरानी सभ्यताओं में गहराई से फैली हुई हैं। माना जाता है कि बैडमिंटन (Badminton) जैसा खेल लगभग दो हज़ार साल पहले ग्रीस, चीन और भारत में किसी न किसी रूप में खेला जाता था। उस समय इसे 'बैटलडोर एंड शटलकॉक' कहा जाता था। इसमें दो लोग लकड़ी के रैकेट से एक हल्के शटलकॉक को जमीन पर गिरने से बचाने का प्रयास करते थे।  इसमें तब कोई स्कोरिंग या प्रतियोगिता नहीं होती थी। यह बस मनोरंजन का एक तरीका था। यह खेल बाद में कोरिया, जापान और दक्षिण एशिया में लोकप्रिय हुआ। समय के साथ यह खेल यूरोप तक पहुंचा और 17वीं-...

Friendship Day : तेरा होना ही काफी है यार, बाकी सब तो वक्त की बातें हैं

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  https://uplive24.com/friendship-day-history-and-messages-in-hindi-english/ Friendship Day पर जानिए दोस्ती के इस खास दिन का इतिहास, महत्व और खूबसूरत संदेश। uplive24.com पर जानिए 3 अगस्त को फ्रेंडशिप डे कैसे मनाएं, क्या कहा है दार्शनिकों ने इस रिश्ते के बारे में। खलील जिब्रान ने कहा है - In the sweetness of friendship let there be laughter यानी दोस्ती की मिठास में हंसी जरूर होनी चाहिए। जहां दोस्त होते हैं, वहां मुस्कानें खुद चलकर आती हैं। हम जब गिरते हैं, तो दोस्त हमें संभालते हैं। जब जिंदगी उलझ जाती है, तो वही दोस्त हमें रास्ता दिखाते हैं। दोस्ती कोई समझौता नहीं, बल्कि एक निस्वार्थ रिश्ता है, जो वक्त, दूरी और हालातों से ऊपर होता है। दोस्त वे हैं जिन्हें हम खुद चुनते हैं, जैसे कोई अपना घर बनाता है। सच्चे दोस्त वे होते हैं जो हमारे बोलने से पहले समझ जाते हैं, जो हमारी आंखों में छुपे दर्द को पढ़ लेते हैं, और जो हमारी खुशियों में सबसे पहले शामिल होते हैं। हर साल अगस्त के पहले रविवार को Friendship Day यानी दोस्ती का दिन मनाया जाता है। इस साल Friendship Day 3 अगस्त, रविवार को है। यह दिन...

US-Russia : बस एक बटन दूर था अमेरिका और रूस में परमाणु युद्ध

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  https://uplive24.com/when-nuclear-war-was-about-to-break-out-between-us-russia/ अमेरिका और रूस (US-Russia) के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बयान के जवाब में दो nuclear submarines को 'उचित क्षेत्रों' में तैनात करने का आदेश दे दिया है।  ट्रंप (Trump) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि उन्होंने यह फैसला एहतियातन लिया है, क्योंकि ऐसे बयान अनचाहे और खतरनाक नतीजों की ओर ले जा सकते हैं। ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब मेदवेदेव ने अमेरिका को सीधा ललकारते हुए कहा कि रूस अपने रास्ते पर चलता रहेगा, और ट्रंप को चेतावनी दी कि वह रूस के साथ ultimatum game न खेलें। मेदवेदेव ने लिखा, 'अमेरिका को याद रखना चाहिए कि रूस कोई इजरायल या ईरान नहीं है। हर नया अल्टीमेटम युद्ध की ओर एक और कदम है।' ऐसे हालात में uplive24.com पर जानिए उस रात के बारे में, जब ये दोनों देश परमाणु युद्ध के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे। वह रात जब गलती से परमाणु हमले का अलार्म बजा और सिर्फ एक ...

Tree of Tenere : कहानी रेगिस्तान के आखिरी साथी की

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  https://uplive24.com/history-of-tree-of-tenere/ रेत के समंदर में अचानक से कोई पेड़ दिख जाए तो? 'Tree of Tenere' को देख दुनिया ऐसे ही चक्कर खा जाती थी। uplive24.com पर जानिए उस पेड़ की कहानी, जिसे सबसे अकेला कहा गया। कभी-कभी एक अकेला पेड़ पूरी इंसानियत की कहानी कह जाता है। अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) में एक ऐसा ही पेड़ खड़ा था, 'Tree of Tenere'। यह कोई आम पेड़ नहीं था, बल्कि हजारों किलोमीटर के उजाड़ रेगिस्तान में अकेला खड़ा रहने वाला दुनिया का सबसे एकांत वृक्ष (Most isolated tree in the world) था। यह पेड़ नाइजर (Niger) देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित टेनेरे क्षेत्र (Tenere Region) में था, जहां मीलों तक कोई दूसरा पेड़ नहीं था। इस पेड़ की खास बात सिर्फ उसका अकेला खड़ा होना नहीं थी, बल्कि यह उन कारवां वालों के लिए एक दिशा सूचक बन गया था जो ऊंटों के साथ रेत के समंदर को पार करते थे। जब इंसानों ने GPS का नाम तक नहीं सुना था, तब यह पेड़ यात्रियों के लिए उम्मीद की एक लौ था। यह पेड़ (Tree of Tenere) Acacia प्रजाति का था, और इतने सूखे इलाके में भी यह जिंदा था...

Ring of Fire : आग का गोला क्यों कही जाती है धरती की यह जगह

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  https://uplive24.com/what-is-ring-of-fire-why-do-earthquakes-tsunamis-occur/ भूकंप और सुनामी क्यों आते हैं? रिंग ऑफ फायर क्या है (Ring of Fire) और इससे जुड़े देशों पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है? धरती का यह रहस्य खुलेगा uplive24.com पर।  धरती के भीतर लगातार कुछ न कुछ हलचल होती रहती है, जिसे आमतौर पर हम महसूस नहीं कर पाते। लेकिन जब यह आंतरिक गतिविधि अचानक सतह तक पहुंचती है, तो वह भूकंप या सुनामी जैसे भयंकर रूप में हमारे सामने आती है। भूकंप और सुनामी, दोनों ही प्राकृतिक आपदाएं हैं, जिनका सीधा संबंध धरती की भूगर्भीय संरचना और टेक्टोनिक प्लेट्स की हरकत से होता है। धरती की ऊपरी परत कई विशाल प्लेटों में बंटी होती है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये प्लेटें बहुत धीमी गति से सरकती रहती हैं, लेकिन जब ये एक-दूसरे से टकराती हैं, या खिसकने में रुकावट आती है, तो धरती के भीतर तनाव जमा होने लगता है। जैसे ही यह तनाव अचानक टूटता है, धरती हिलने लगती है और यह कम्पन जब सतह तक पहुंचता है तो उसे हम भूकंप कहते हैं।  यही प्रक्रिया अगर समुद्र के अंदर होती है, तो उसका असर पानी की सतह ...

Earthquake : भारत के प्राचीन मंदिरों को क्यों नहीं हिला पाया भूकंप

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  https://uplive24.com/how-ancient-temples-of-india-survive-the-earthquake/ uplive24.com पर जानिए कि कैसे भारत के प्राचीन मंदिर प्राकृतिक आपदाओं को झेलते हुए आज भी खड़े हैं, कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होती थी इनमें? जब सत्रहवीं सदी में दक्षिण भारत में एक भीषण भूकंप (Earthquake) आया, तो कई किले और मंदिर जमींदोज़ हो गए। लेकिन उसी दौरान एक मंदिर ऐसा भी था, जो बिना किसी खरोंच के खड़ा रहा। इसे भगवान का चमत्कार समझा गया। लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसकी पड़ताल की, तो सामने आई प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग की एक अद्भुत मिसाल। यह है रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple)। तेलंगाना में स्थित यह मंदिर आज न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भूकंपरोधी निर्माण तकनीक (Earthquake resistant architecture) का एक बेहतरीन उदाहरण भी है। 800 साल पुराने इस मंदिर को बनाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, वह थी सैंडबॉक्स टेक्नोलॉजी (Sandbox Technology)। इस पद्धति में मंदिर की नींव के नीचे रेत भरी जाती है ताकि भूकंप (Earthquake) के झटकों की ऊर्जा वहीं सोख ली जाए और संरचना को कोई नुकसान न हो। यह मंदिर काकतीय राजवंश (Kakatiya D...

Jyoteshwar Mahadev : यहां भगवान को घेरे हुए हैं 5 नंदी, इसके पीछे है खास वजह

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  https://uplive24.com/five-nandi-in-jyoteshwar-mahadev-temple-of-uttarakhand/ आदि गुरु शंकराचार्य ने जिस पेड़ के नीचे बैठकर ज्योति प्राप्त की, उसी के पास है ज्योतेश्वर महादेव मंदिर (Jyoteshwar Mahadev)। इसके महात्म्य और परंपरा के बारे में जानिए uplive24.com पर। डॉ. बृजेश सती  शिव मंदिरों (Shiv Mandir) में शिवलिंग के ठीक सामने उनके गण नंदी की मूर्ति स्थापित की जाती है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से दो - ओंकारेश्वर महादेव और काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) अपवाद हैं। यहां नंदी शिवलिंग के ठीक सामने न होकर बगल में स्थापित किए गए हैं। अब बात करते हैं देश के ऐसे शिवालय (Shiv Mandir) की, जहां एक-दो नहीं] बल्कि पांच नंदी विराजमान हैं। ऐसा यह देश का एकमात्र शिव मंदिर है। यह शिवालय उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ विकासखंड का ज्योतेश्वर महादेव (Jyoteshwar Mahadev) है।  ज्योतेश्वर महादेव (Jyoteshwar Mahadev) मंदिर की स्थापना 5वीं सदी में भागवदपाद आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी। ज्योतिर्मठ वह स्थान है , जहां दिग्विजय यात्रा के बाद आदि गुरु शंकराचार्य का आगमन हुआ। यहीं पर उन्होंने कल्...

Asia Cup : क्या BCCI की याददाश्त इतनी कमजोर है, जो उसे पहलगाम याद नहीं रहा?

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  https://uplive24.com/why-bcci-agree-for-asia-cup/ Asia Cup होगा। अब तो शेड्यूल भी आ गया। उसी मोहसिन नकवी ने इसका ऐलान किया, जो पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर पहलगाम हमले पर झूठ बोल रहा था। ऐसी क्या मजबूरी है BCCI की? uplive24.com का मानना है कि खेल को राजनीति से अलग रखने वाली नीति पाकिस्तान जैसे आतंकी देशों के लिए नहीं है। Sea Squirt का नाम आपने कभी डिस्कवरी चैनल के किसी शो में या कहीं सुना हो सकता है। माना जाता है कि इसकी याददाश्त सबसे कम होती है - कह सकते हैं कि होती ही नहीं।  यह समुद्री जीव अपने जीवन की शुरुआत में छोटा-सा लार्वा होता है। तैरता रहता है पानी में। इस दौरान इसमें एक सरल नर्वस सिस्टम होता है, जिसे दिमाग का प्रारंभिक रूप कह सकते हैं।  तैरते-तैरते फिर यह लार्वा किसी चट्टान पर चिपक जाता है और बाकी जीवन उसी तरह से गुजार देता है। हैरत की बात यह है कि बड़ा होने के दौरान यह अपना खुद का दिमाग खा जाता है। इस तरह ज्यादातर जीवन यह बिना दिमाग के गुजारता है। न दिमाग और न याददाश्त। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को देखकर Sea Squirt की याद आती है - कम से कम याददाश्त...