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Jawaharlal Nehru : क्या थी नेहरू की आखिरी इच्छा?

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https://uplive24.com/last-wish-of-pandit-jawaharlal-nehru/ पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 61वीं पुण्यतिथि पर उनकी वसीयत के भावुक अंश सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने अपनी अस्थियां भारत के खेतों में बिखेरने की इच्छा जताई थी।  27 मई 2025 को जब देश ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 61वीं पुण्यतिथि मनाई, तब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनकी वसीयत के कुछ अंश सार्वजनिक किए। यह वसीयत उन्होंने अपनी मौत से लगभग दस साल पहले लिखी थी, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में अपनी आखिरी इच्छा दर्ज की थी। वह चाहते थे कि उनकी अस्थियां देश के खेतों में उड़ाकर बिखेर दी जाएं, ताकि वे भारत की मिट्टी में समा जाएं। नेहरू ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनकी अस्थियों का बड़ा हिस्सा एक विमान में ऊंचाई पर ले जाकर उन खेतों में बिखेर दिया जाए, जहां भारत का किसान मेहनत करता है। वह चाहते थे कि उनकी राख देश की उस धरती का हिस्सा बन जाए, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया। उनकी वसीयत में एक और महत्वपूर्ण अनुरोध था - उन्होंने लिखा, 'मेरी एक मुठ्ठी अस्थियां प्रयागराज में गंगा न...

Basava Raju : 15 दिनों की प्लानिंग और तीन दिनों की जंग, ऐसे मारा गया सबसे बड़ा नक्सली बसव राजू

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https://uplive24.com/why-the-naxalite-movement-cannot-continue-without-basava-raju/ बसवराजू (Basava Raju) केवल CPI (माओवादी) का सर्वोच्च कमांडर ही नहीं, इस पूरे आंदोलन की रीढ़ था। उसकी मौत के बाद नक्सली अब सिर नहीं उठा पाएंगे। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अभूझमाड़ के जंगलों में बुधवार को एक ऐतिहासिक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 27 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए उग्रवादियों में भारत का सबसे बड़े माओवादी नेता और सीपीआई (माओवादी) महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू (Basava Raju) भी शामिल था। यह पहली बार है जब नक्सलवाद के खिलाफ चल रही तीन दशक पुरानी लड़ाई में इतने ऊंचे पद पर बैठे माओवादी नेता को मार गिराया गया है। देश के नंबर-1 नक्सली का खात्मा बसवराजू (Basava Raju) माओवादी पार्टी की रीढ़ माना जाता था। उसके सिर पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसकी मौत को नक्सली आंदोलन (Naxal Movement) के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने ऑपरेशन के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, 'नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि ह...

Indus Waters Treaty : सिंधु पर नेहरू की गलती सुधारने का समय आ गया

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https://uplive24.com/ जवाहरलाल नेहरू ने Indus Waters Treaty को मानवीय आधार पर जरूरी बताया था। लेकिन पाकिस्तान इस लायक नहीं कि उसके साथ मानवीयता दिखाई जाए। पाकिस्तान (Pakistan) को अब शायद समझ में आए कि जब भारत अपने जल-अधिकारों पर सवाल उठाता है, तो वह केवल गुस्से में नहीं होता, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय का हिसाब मांग रहा होता है। पहलगाम में आतंकी हमले (Pahalgam terrorist attack) के बाद भारत ने अब सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) को सस्पेंड करने का ऐलान कर दिया है। यह कोई साधारण घोषणा नहीं, बल्कि 64 साल से झेली जा रही जल-सहिष्णुता के अंत की शुरुआत है। पानी का बदला पानी से साल 2016 में जब उरी में भारतीय फौजियों पर हमला हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुस्से में कहा था, 'रक्त और जल एक साथ नहीं बह सकते।' उसी दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इशारा कर दिया था कि अगर पाकिस्तान आतंक की राह पर चलता रहा, तो भारत पानी की राह बंद कर देगा। अब हालात फिर से वहीं पहुंच गए हैं। पहलगाम (Pahalgam terrorist attack) में पर्यटकों पर हुए कायराना हमले ने भारत को झकझोर दिय...

Pahalgam attack : भारत की स्ट्राइक से डरे पाकिस्तान ने दी सफाई

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https://uplive24.com/ https://uplive24.com/pakistan-fears-indian-strike-in-response-to-pahalgam-attack/   पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam attack) के अगले ही दिन पाकिस्तान ने सफाई दी कि इसमें उसका हाथ नहीं। यह सफाई से ज्यादा उसका डर है।  पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले (Pahalgam attack) में 28 निर्दोष पर्यटकों की हत्या ने एक बार फिर आतंकवाद की जड़ पर उंगली उठाई है - और वह जड़ है पाकिस्तान (Pakistan)। लेकिन इस बार पाकिस्तान सिर्फ इनकार नहीं कर रहा, वह डरा हुआ है। डर इस बात का कि कहीं भारत फिर से बालाकोट जैसी कार्रवाई न कर दे, जैसा उसने पुलवामा हमले के बाद किया था। 'हमें इससे कोई वास्ता नहीं...' - पाकिस्तान की घबराहट का सबूत हमले (Pahalgam attack) के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) और विदेश मंत्रालय ने बड़ी सफाई से कहा, 'हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं।' लेकिन सवाल यह है कि अगर वास्ता नहीं है, तो इतनी जल्दी बयान क्यों देना पड़ा? इसका सीधा जवाब है - भारत की प्रतिक्रिया का डर। 2016 के Uri attack और फिर 2019 के Pulwama attack के बाद भारत की रणनीति साफ ...