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Jawaharlal Nehru : क्या थी नेहरू की आखिरी इच्छा?

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https://uplive24.com/last-wish-of-pandit-jawaharlal-nehru/ पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 61वीं पुण्यतिथि पर उनकी वसीयत के भावुक अंश सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने अपनी अस्थियां भारत के खेतों में बिखेरने की इच्छा जताई थी।  27 मई 2025 को जब देश ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 61वीं पुण्यतिथि मनाई, तब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनकी वसीयत के कुछ अंश सार्वजनिक किए। यह वसीयत उन्होंने अपनी मौत से लगभग दस साल पहले लिखी थी, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में अपनी आखिरी इच्छा दर्ज की थी। वह चाहते थे कि उनकी अस्थियां देश के खेतों में उड़ाकर बिखेर दी जाएं, ताकि वे भारत की मिट्टी में समा जाएं। नेहरू ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनकी अस्थियों का बड़ा हिस्सा एक विमान में ऊंचाई पर ले जाकर उन खेतों में बिखेर दिया जाए, जहां भारत का किसान मेहनत करता है। वह चाहते थे कि उनकी राख देश की उस धरती का हिस्सा बन जाए, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया। उनकी वसीयत में एक और महत्वपूर्ण अनुरोध था - उन्होंने लिखा, 'मेरी एक मुठ्ठी अस्थियां प्रयागराज में गंगा न...

Indus Waters Treaty : सिंधु पर नेहरू की गलती सुधारने का समय आ गया

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https://uplive24.com/ जवाहरलाल नेहरू ने Indus Waters Treaty को मानवीय आधार पर जरूरी बताया था। लेकिन पाकिस्तान इस लायक नहीं कि उसके साथ मानवीयता दिखाई जाए। पाकिस्तान (Pakistan) को अब शायद समझ में आए कि जब भारत अपने जल-अधिकारों पर सवाल उठाता है, तो वह केवल गुस्से में नहीं होता, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय का हिसाब मांग रहा होता है। पहलगाम में आतंकी हमले (Pahalgam terrorist attack) के बाद भारत ने अब सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) को सस्पेंड करने का ऐलान कर दिया है। यह कोई साधारण घोषणा नहीं, बल्कि 64 साल से झेली जा रही जल-सहिष्णुता के अंत की शुरुआत है। पानी का बदला पानी से साल 2016 में जब उरी में भारतीय फौजियों पर हमला हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुस्से में कहा था, 'रक्त और जल एक साथ नहीं बह सकते।' उसी दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इशारा कर दिया था कि अगर पाकिस्तान आतंक की राह पर चलता रहा, तो भारत पानी की राह बंद कर देगा। अब हालात फिर से वहीं पहुंच गए हैं। पहलगाम (Pahalgam terrorist attack) में पर्यटकों पर हुए कायराना हमले ने भारत को झकझोर दिय...

Constitution : पाकिस्तान का संविधान बनाने वाला बाद में कैसे पछताया

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https://uplive24.com/ https://uplive24.com/china-and-pakistan-will-do-donkey-trade/ भारत की देखादेखी पाकिस्तान ने अपना संविधान (Constitution) बनाने का प्रयास किया। इसके लिए उसने एक बड़े अंग्रेज नाम को चुना। हालांकि पाकिस्तान का संविधान और उसे बनाने वाले, दोनों ही फ्लॉप हुए। अंबेडकर जयंती पर विशेष।  जब भारत का संविधान (Indian Constitution) बना रहा था, उस समय आइवर जेनिंग्स (Ivor Jennings) का नाम चर्चा में था। जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि वही संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बनें। लेकिन महात्मा गांधी की राय से डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) को यह जिम्मेदारी मिली।  आइवर जेनिंग्स एक ब्रिटिश संविधान विशेषज्ञ (constitutional expert) थे। उनका जन्म 1903 में हुआ था और वह यूनाइटेड किंगडम के जाने-माने शिक्षाविद् और कानूनविद् थे। वह ब्रिटिश संविधान और कामन लॉ पर गहरी पकड़ रखते थे। भारत में तो उनको मौका नहीं मिला, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें जरूर बुलाया। पाकिस्तान का संविधान और जेनिंग्स (Constitution of Pakistan) 1947 में पाकिस्तान नया-नया आजाद हुआ था और उसे भी अपना संविधान बनाना था...

Dr. B.R. Ambedkar : अंबेडकर की जगह लेना चाहता था एक अंग्रेज

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https://uplive24.com/nehru-did-not-want-dr-b-r-ambedkar-to-lead-constitution-drafting-committee/ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) ने भारतीय संविधान को आकार देने में खूब मेहनत की, लेकिन यह जिम्मेदारी उन्हें मिली कैसे - इसकी भी एक कहानी है। अंबेडकर जयंती (Ambedkar Jayanti) पर विशेष।  डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) का नाम सुनते ही दिमाग में कोंधता है संविधान। वह शख्स जिसने सामाजिक न्याय की नींव रखी और समानता पर बात की।  संविधान, केवल कानूनों की एक किताब भर नहीं है। यह भारत की आत्मा है, इसकी विविधता में एकता का अद्भुत प्रमाण है। लेकिन इस आत्मा को स्वरूप देने की प्रक्रिया किसी सीधी रेखा जैसी नहीं थी। इसके पीछे था एक संघर्ष -  अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) बनाम जेनिंग्स।  आप सवाल पूछ सकते हैं कि ये जेनिंग्स कौन हैं, कहां से बीच में आ गए और हमारे अंबेडकर से इनकी क्या तुलना? तो आइवर जेनिंग्स (Ivor Jennings) वह हैं, जो संविधान (Indian Constitution) की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष बन सकते थे। अगर जवाहरलाल नेहरू की चलती, तो भारतीय संविधान बनाने का जिम्मा उन्हीं...

Indira and emergency : जब इंदिरा ने कहा इमरजेंसी हटेगी तो देश हैरान रह गया

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https://uplive24.com/did-indira-gandhi-lift-emergency-because-of-sanjay-gandhi/ राज नारायण ने 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी पर भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि इंदिरा ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। राज नारायण की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा को दोषी ठहरा दिया। जब इंदिरा को लगा कि सत्ता उनके हाथ से निकल रही है, तो उन्होंने देश पर इमरजेंसी लाद दी। 25 जून 1975, यही वह काली तारीख है जब भारतीय लोकतंत्र को पिंजरे में कैद कर दिया गया। देश आपातकाल (Emergency) में पहुंच गया। जनता के सभी अधिकार छीन लिए गए। विपक्षी नेताओं को जेल में भर दिया गया। अखबारों पर निगरानी बढ़ गई। जिसने भी इमरजेंसी के खिलाफ आवाज उठाई, उसे सलाखों के पीछे डाल दिया गया। सारी ताकत इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के हाथों में आ गई थी, लेकिन क्या यह सच था? क्या वाकई सारी ताकत इंदिरा के ही हाथों में थी? राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इमरजेंसी के पीछे संजय गांधी (Sanjay Gandhi) का दिमाग था और इमरजेंसी के दौरान भी सबसे ज्यादा ताकत उन्हीं के पास थी। बल्कि सही कहा ज...