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भारत के 'नागराज', जिनसे अमेरिका ने मांगी मदद

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  भारतीय जनजाति इरुला का गुजर बसर लगभग सांपों पर ही टिका है। एक समय था, जब इन पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया था, लेकिन अब सांपों के जहर की काट तैयार करने में इनका योगदान अहम है। पूरी रिपोर्ट पढ़िए uplive24.com पर। 1960 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में वायरल टीवी प्रोग्राम बनाने का चलन शुरू हो गया था। ऐसे कार्यक्रमों में लोग खतरनाक वन्य जीवों के साथ करतब दिखाते थे। खतरनाक वन्य जीवों में पहले स्थानीय जानवार ही थे, लेकिन फिर मामला पहुंच गया विदेशी जानवरों तक। यही वजह थी कि अमेरिका में दूर देशों से दुलर्भ जानवरों की खेप पहुंचाई जाने लगी। शौक, सर्कस, रिसर्च और दिखावे के लिए लोगों ने बाघ, अजगर, शेर जैसे जानवर भी पालने शुरू किए।  लेकिन, 1980 के दशक में यह शौक कुछ लोगों के लिए सिरदर्द साबित होने लगा। बाकी जानवरों तक तो ठीक था, लेकिन अजगर को लेकर परेशानी ज्यादा बढ़ी। आजिज आकर कुछ लोगों ने अजगरों को जंगल में छोड़ दिया। ऐसा करके उन्होंने अपनी मुश्किल तो हल कर ली, लेकिन पूरे फ्लोरिडा की मुसीबत बढ़ा दी।  फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स नैशनल पार्क का मौसम और नमी अजगरों को रास आने लगे और उनकी तादाद...

Mennonites : वे अमेरिकी जो आज भी बिजली, फोन से दूर हैं

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https://uplive24.com/story-of-mennonites-in-america/ अमेरिका की मेनोनाइट्स कम्युनिटी (Mennonites) की अनकही कहानी। जानिए जैकब जैसे परिवारों की जिंदगी, जिनकी दुनिया तकनीक से नहीं, परंपरा, शांति और आध्यात्मिक संतुलन से चलती है। पढ़िए कैसे ये समुदाय आधुनिक अमेरिका में भी अपनी सादगी भरी जिंदगी को जीता है। सुबह के छह बजे हैं। अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के एक गांव की गलियों में ओस की नमी और मिट्टी की सोंधी गंध हवा में घुल रही है। दूर से एक बग्गी की आवाज आती है - लकड़ी के पहियों की चरमराहट और घोड़े के टापों की टक-टक। बग्गी पर बैठे हैं जैकब मिलर।  जीवन के चार दशक देख चुके जैकब के सिर पर टोपी, बदन पर सफेद शर्ट और आंखों में चमक है।  उम्र लगभग 38 साल, सिर पर टोपी, सफेद शर्ट, और आंखों में शांति की चमक। वह अपने खेतों की ओर जा रहे हैं। साथ में है बाइबिल। जैकब के पास न स्मार्टफोन है, न फेसबुक अकाउंट। बिजली के तार उनके घर से नहीं जुड़े हैं। लेकिन उनके बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान है, वह शायद किसी बड़े शहर के पेंटहाउस में रहने वाले बच्चे की मुस्कान से कहीं ज्यादा असली लगती है। यह वक्त पिछली सदी...

Terrorist attack : जब उड़ते विमान में हुआ छेद, गिरने लगे यात्री

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1986 में इसी विमान पर आतंकी हमला हुआ था। मरम्मत के बाद इसे फिर उतारा गया। https://uplive24.com/when-a-terrorist-attack-took-place-on-a-flying-plane/ 2 अप्रैल 1986, विमानन इतिहास का एक काला अध्याय। यह वह दिन था जब अमेरिकी एयरलाइन TWA (Trans World Airlines) फ्लाइट 840 पर एक बम विस्फोट (Terrorist attack) हुआ, जिसने आसमान में तबाही मचा दी। रोम से काहिरा जा रहे इस विमान में सवार यात्रियों के लिए यह एक सामान्य उड़ान थी, लेकिन कुछ ही क्षणों में यह सफर मौत का जाल बन गया।  विस्फोट जिसने विमान को हवा में हिला दिया TWA फ्लाइट 840, बोइंग 727 विमान, 115 यात्रियों और 7 क्रू सदस्यों के साथ उड़ान पर था। यह विमान ग्रीस के ऊपर 11,000 फीट (3,350 मीटर) की ऊंचाई पर उड़ रहा था, जब अचानक एक जबरदस्त धमाका हुआ। यह धमाका सीट 10F के नीचे रखे बम के फटने से हुआ था। विस्फोट इतना ताकतवर था कि विमान के दाईं तरफ, विंग के ठीक सामने, 2 मीटर x 1 मीटर का एक बड़ा छेद हो गया। उस जगह पर बैठे यात्री अचानक हवा के तेज़ दबाव में विमान से बाहर गिरने लगे। चार यात्री आसमान से गिरकर मौत के शिकार हुए ब्लास्ट की वजह से विमान में ब...