Independence Day : पिस्तौल काम आई न जिन्ना का लालच, ऐसे एक बना भारत
Vellore Revolt : बस 5 मिनट से बच गए थे अंग्रेज वरना वेल्लोर विद्रोह से मिल जाती आजादी! आजादी (Independence Day) मिलने वाली थी, लेकिन देश भीतर से बंटा हुआ था। अगर भीतर एकजुटता न आती तो लंबे संघर्ष के बाद मिलने वाली स्वतंत्रता का मतलब नहीं रहता। किस तरह एक हुआ भारत, uplive24.com पर Independence Day Special Story : Independence Day : 1947 की तपती गर्मियों में, जब भारत आजादी (Independence Day) की दहलीज पर खड़ा था, दिल्ली के वायसराय हाउस में एक युवा राजा बेचैनी से कुर्सी पर पहलू बदल रहा था। यह थे जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह - महज 23 साल के, लेकिन आज के दिन उनके सामने ऐसा फैसला था, जो इतिहास की दिशा तय कर सकता था। उनका माथा क्रोध से तप रहा था। उनके पूर्वजों ने जिस राज्य पर गर्व से शासन किया था, वह अब उनके हाथ से फिसल रहा था। अचानक, उन्होंने पिस्तौल निकाली और उसे वी.पी. मेनन की ओर तान दिया। कमरे में सन्नाटा छा गया। पर मेनन का चेहरा शांत रहा। ठंडे स्वर में उन्होंने बस इतना कहा कि इससे विलय रुकने वाला नहीं। और जैसे किसी जादू से, हनवंत सिंह का हाथ नीचे हो गया। कुछ क्षण बाद, जोधपुर भ...