अमेरिकियों से इतने अलग क्यों दिखते हैं लैटिन अमेरिका के लोग?

 Why Latin Americans look different : लैटिन अमेरिका के साथ अमेरिका फिर टकराव के रास्ते पर चल पड़ा है। एक ही महाद्वीप में होने के बावजूद दोनों दो दूर दुनिया के हिस्से लगते हैं। इस अंतर की वजह जानिए uplive24.com पर। 

Why Latin Americans look different : जब भी अमेरिका और लैटिन अमेरिका की चर्चा होती है, तो एक सवाल बार-बार उभरता है - एक ही महाद्वीप में रहने वाले लोग इतने अलग क्यों दिखते हैं? उनकी भाषा अलग क्यों है, संस्कृति अलग क्यों है और सबसे अहम, अमेरिका के साथ उनके रिश्तों में हमेशा तनाव क्यों रहता है?

इस सवाल का जवाब सिर्फ रंग-रूप या चेहरे-मोहरे में नहीं छिपा है। इसकी जड़ें इतिहास, उपनिवेशवाद, नस्लीय संरचना और अमेरिका की विदेश नीति में गहराई तक फैली हुई हैं। वेनेजुएला संकट हो, क्यूबा से दशकों पुरानी तनातनी हो या ब्राजील के साथ बढ़ता रणनीतिक तनाव - हर घटना इसी बड़े फ्रेम का हिस्सा है (Why Latin Americans look different)।

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उपनिवेशवाद ने दो अलग-अलग अमेरिका बनाए

आज जिसे हम संयुक्त राज्य अमेरिका कहते हैं, उसकी नींव मुख्य रूप से ब्रिटिश उपनिवेशवाद पर टिकी। वहां शासन, कानून, भाषा और सामाजिक ढांचा अंग्रेजी परंपरा से विकसित हुआ। लंबे समय तक सत्ता और पहचान यूरोपीय मूल के श्वेत समुदाय के इर्द-गिर्द घूमती रही।

इसके उलट, लैटिन अमेरिका में उपनिवेशवादी ताकतें थीं स्पेन और पुर्तगाल। उन्होंने केवल शासन ही नहीं किया, बल्कि स्थानीय समाज को पूरी तरह बदल दिया (Why Latin Americans look different)।

यहां तीन समुदायों का गहरा मेल हुआ - स्थानीय आदिवासी जनजातियां, यूरोप से आए स्पेनिश-पुर्तगाली शासक और अफ्रीका से लाए गए गुलाम।

इसी मिश्रण से मेस्टिजो और मुलाटो जैसी पहचानें बनीं। यही कारण है कि लैटिन अमेरिका में त्वचा का रंग, चेहरे की बनावट और सांस्कृतिक पहचान बहुत विविध दिखाई देती है। इसलिए वहां के लोग अमेरिकियों से अलग दिखते हैं (Why Latin Americans look different)। यह जैविक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक कारण है।

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भाषा और संस्कृति ने खींच दी स्थायी रेखा

अमेरिका की पहचान अंग्रेजी भाषा और प्रोटेस्टेंट संस्कृति से बनी, जबकि लैटिन अमेरिका की पहचान बनी स्पेनिश और पुर्तगाली भाषा। वहां कैथोलिक चर्च का प्रभाव है।

लैटिन अमेरिका में परिवार, समुदाय और भावनात्मक रिश्तों को सामाजिक जीवन का आधार माना जाता है, जबकि अमेरिका में व्यक्ति-केंद्रित सोच अधिक हावी रही। यही फर्क राजनीति और समाज, दोनों में झलकता है (Why Latin Americans look different)।

अमेरिका से समस्या

लैटिन अमेरिका में अमेरिका को लेकर एक ऐतिहासिक असहजता रही है। आज भले ही अमेरिका खुद को लोकतंत्र और मानवाधिकारों का रक्षक बताए, लेकिन इस क्षेत्र के कई देशों के लिए अमेरिका एक ऐसी शक्ति रहा है जिसने सरकारें गिराने या बदलने में भूमिका निभाई, आर्थिक प्रतिबंध लगाए और अपने रणनीतिक और कारोबारी हितों को प्राथमिकता दी। यहीं से अमेरिका और लैटिन अमेरिका के बीच अविश्वास की दीवार खड़ी हुई (Why Latin Americans look different)।

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लैटिन अमेरिका में टकराव के तीन चेहरे

अमेरिका ने वेनेजुएला में सीधा दखल दिया है, जबकि क्यूबा और ब्राजील को चेतावनी दी है। 

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है, लेकिन अमेरिका के साथ उसके रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, सत्ता परिवर्तन को खुला समर्थन दिया और उसकी सरकार को अवैध करार दिया।

वेनेजुएला की सरकार ने इसे संप्रभुता पर हमला बताया। इस टकराव का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को हुआ। महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी, बड़े पैमाने पर पलायन हुआ।

क्यूबा और अमेरिका का तनाव केवल वैचारिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक है। समाजवादी क्यूबा अमेरिका के लिए दशकों तक खतरे का प्रतीक रहा, जबकि क्यूबा के लिए अमेरिका आर्थिक नाकेबंदी और दबाव का चेहरा।

अमेरिकी प्रतिबंधों ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया, लेकिन क्यूबा ने इसे अपनी राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़कर देखा। इसी वजह से आज भी लैटिन अमेरिका में क्यूबा, अमेरिका के विरोध का एक भावनात्मक प्रतीक बना हुआ है।

ब्राजील अमेरिका का शत्रु नहीं है, लेकिन वह खुद को लैटिन अमेरिका की स्वतंत्र शक्ति के रूप में देखता है।

चीन के साथ बढ़ते रिश्ते, अमेजन जंगलों को लेकर मतभेद और वैश्विक राजनीति में अलग रुख - ये सब अमेरिका को असहज करते हैं।

ब्राजील चाहता है कि उसे अमेरिका के पिछलग्गू की तरह नहीं, बल्कि एक बराबरी की शक्ति की तरह देखा जाए। यही सोच उसे अमेरिका से अलग खड़ा करती है।

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