वंदे मातरम् से इतना डरते क्यों थे अंग्रेज?
आज 'वंदे मातरम्' (Vande Mataram) के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह रचना केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता की आत्मा थी। uplive24.com पर जानिए कैसे यह कविता एक राष्ट्रीय भावना बन गई। 7 नवंबर 1875 - यह वह दिन था जब भारत के इतिहास में एक अमर ध्वनि जन्मी थी, वंदे मातरम् (Vande Mataram)। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी यह कविता सिर्फ शब्दों का मेल नहीं थी, बल्कि एक ऐसी भावनात्मक पुकार थी जिसने लाखों भारतीयों के भीतर स्वतंत्रता का ज्वालामुखी जगा दिया। उस समय भारत अंग्रेज़ी शासन के अधीन था, और राष्ट्र की चेतना मानो कहीं दब सी गई थी। इसी मौन में, बंकिम चंद्र ने बंगदर्शन नामक अपनी साहित्यिक पत्रिका के नवंबर 1875 के अंक में यह रचना (Vande Mataram) प्रकाशित की। बाद में उन्होंने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया - जहां 'वंदे मातरम्' भारतमाता की भक्ति का गीत बनकर उभरा। Vellore Revolt : बस 5 मिनट से बच गए थे अंग्रेज वरना वेल्लोर विद्रोह से मिल जाती आजादी! रवींद्रनाथ टैगोर ने दी आवाज वंदे मातरम् के शब्दों में पहले ही ऊर्जा थी,...