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क्या नास्त्रेदमस ने वाकई भविष्य देखा था?

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नास्त्रेदमस (Nostradamus) कौन थे, उनकी कौन-सी भविष्यवाणियां सच हुईं और साल 2026 को लेकर युद्ध, ड्रोन हमले व पश्चिमी ताकत के पतन की डरावनी भविष्यवाणियां क्या कहती हैं, uplive24.com पर पढ़िए पूरी रिपोर्ट। Who was Nostradamus : इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिनका जिक्र होते ही रहस्य, डर और जिज्ञासा एक साथ जाग उठती है। नास्त्रेदमस उन्हीं नामों में से एक हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई उनकी भविष्यवाणियां आज भी लोगों को हैरान करती हैं। खास बात यह है कि नास्त्रेदमस ने भविष्य को सीधे शब्दों में नहीं, बल्कि रहस्यमय दोहों और प्रतीकों के जरिए बताया, जिनका अर्थ हर दौर में नए सिरे से निकाला जाता रहा है। अब जब दुनिया 2026 के दरवाज़े पर खड़ी है, तो एक बार फिर नास्त्रेदमस की डरावनी भविष्यवाणियां चर्चा में हैं। सवाल वही है - क्या नास्त्रेदमस ने सच में आने वाले समय की झलक देख ली थी? 1600 year old Roman wine factory : तुर्की के पहाड़ों में मिली सदियों पुरानी शराब फैक्ट्री नास्त्रेदमस (Nostradamus) कौन थे और क्यों इतने प्रसिद्ध हैं? नास्त्रेदमस का पूरा नाम माइकल दि नास्त्रेदमस (Michel de Nostredame) था। ...

भारत के 'नागराज', जिनसे अमेरिका ने मांगी मदद

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  भारतीय जनजाति इरुला का गुजर बसर लगभग सांपों पर ही टिका है। एक समय था, जब इन पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया था, लेकिन अब सांपों के जहर की काट तैयार करने में इनका योगदान अहम है। पूरी रिपोर्ट पढ़िए uplive24.com पर। 1960 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में वायरल टीवी प्रोग्राम बनाने का चलन शुरू हो गया था। ऐसे कार्यक्रमों में लोग खतरनाक वन्य जीवों के साथ करतब दिखाते थे। खतरनाक वन्य जीवों में पहले स्थानीय जानवार ही थे, लेकिन फिर मामला पहुंच गया विदेशी जानवरों तक। यही वजह थी कि अमेरिका में दूर देशों से दुलर्भ जानवरों की खेप पहुंचाई जाने लगी। शौक, सर्कस, रिसर्च और दिखावे के लिए लोगों ने बाघ, अजगर, शेर जैसे जानवर भी पालने शुरू किए।  लेकिन, 1980 के दशक में यह शौक कुछ लोगों के लिए सिरदर्द साबित होने लगा। बाकी जानवरों तक तो ठीक था, लेकिन अजगर को लेकर परेशानी ज्यादा बढ़ी। आजिज आकर कुछ लोगों ने अजगरों को जंगल में छोड़ दिया। ऐसा करके उन्होंने अपनी मुश्किल तो हल कर ली, लेकिन पूरे फ्लोरिडा की मुसीबत बढ़ा दी।  फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स नैशनल पार्क का मौसम और नमी अजगरों को रास आने लगे और उनकी तादाद...

क्या परमाणु बम भी खो सकते हैं?

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  अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप किया है तो लोग इतिहास याद कर रहे कि वॉशिंगटन ने कब-कब इस तरह की गुस्ताखियां की हैं। लेकिन, कुछ घटनाएं ऐसी भी हैं, जो आती तो गुस्ताखी की श्रेणी में हैं, लेकिन उन्हें छिपाया गया। परमाणु बम को खो देना, क्या सुना है कभी? क्या परमाणु बम भी खो सकते हैं, किसने और कैसे खोए परमाणु बम, क्या ये बम अब भी फट सकते हैं, क्या है ब्रोकन ऐरो - इन सवालों के जवाब में पढ़िए इतिहास से एक रोचक कहानी uplive24.com पर। फ्रांसिस्को सिमो ऑर्ट्स हर दिन अपनी छोटी-सी नाव में बैठकर उतर जाते भूमध्य सागर में, मछलियां पकड़ने। स्पेन के जिस टाउन पालोमारेस (Palomares) में घर था उनका, वहां का मुख्य काम ही यही था। मछलियां पकड़ना और खेती। 17 जनवरी 1966 की सुबह भी वह नाव में बैठे जाल में मछलियों को फंसाने का इंतजाम कर रहे थे। ठीक उसी समय, उनके ऊपर आसमान में करीब साढ़े 9 हजार मीटर की ऊंचाई पर एक घटना घटने जा रही थी। सोवियत संघ के खिलाफ शीत युद्ध को देखते हुए अमेरिकी सेना हर समय अलर्ट पर रहती थी तब। उसकी एयरफोर्स भी, जिसके विमान हर वक्त आकाश में चक्कर काटा करते, ताकि जंग के हालात मे...

लैटिन अमेरिका में बार-बार क्यों कूद पड़ता है अमेरिका?

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  US Latin America intervention history : वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने एक बार फिर अमेरिका-लैटिन अमेरिका टकराव के पुराने इतिहास को सामने ला दिया है। Banana Wars से लेकर CIA तख्तापलट, क्यूबा, चिली और वेनेजुएला तक - uplive24.com पर जानिए दो सदियों की पूरी कहानी। US Latin America intervention history : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला पर हुए सैन्य हमले ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर अमेरिका और लैटिन अमेरिका के लंबे और विवादास्पद रिश्तों की ओर खींच लिया है। कराकस में धमाके, सैन्य ठिकानों पर हमले और सत्ता परिवर्तन के संकेत ऐसे नहीं हैं जो इतिहास में पहली बार दिखाई दे रहे हों। पिछले दो सौ वर्षों में अमेरिका ने मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और कैरेबियन देशों में बार-बार सैन्य हस्तक्षेप किए हैं। कभी इन्हें सुरक्षा के नाम पर जायज ठहराया गया, तो कभी लोकतंत्र बचाने या ड्रग्स के खिलाफ युद्ध का बहाना बनाया गया। लेकिन आलोचकों का मानना है कि असली वजह अक्सर सत्ता परिवर्तन और अमेरिकी हितों की रक्षा रही है (US Latin America intervention history)। US Venezuela Crisis : ट्रंप ने...

ये पैरों के निशान बताते हैं, सऊदी अरब में कभी हरियाली थी

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  Oldest human footprints : सऊदी अरब में 1.15 लाख साल पुराने मानव पदचिह्न मिले हैं। Alathar साइट पर मिले ये निशान अरब प्रायद्वीप में इंसानों की अब तक की सबसे पुरानी प्रत्यक्ष मौजूदगी का प्रमाण माने जा रहे हैं। uplive24.com पर पढ़िए यह खास रिपोर्ट। Oldest human footprints : आज का सऊदी अरब, जिसे हम सूखे रेगिस्तान, तेज हवाओं और तपते रेत के समंदर के रूप में जानते हैं, कभी जीवन से भरपूर रहा होगा। सऊदी अरब के Nefud Desert में वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं, जो बताते हैं कि आज से करीब 1 लाख 15 हजार साल पहले यहां इंसान मौजूद थे। यह सबूत मानव पैरों के जीवाश्म पदचिह्न (Oldest human footprints) हैं। इस ऐतिहासिक स्थल को नाम दिया गया है Alathar, जिसका अरबी अर्थ होता है - निशान या छाप। यह जगह सऊदी अरब के पश्चिमी Nefud Desert में स्थित है। लंबे समय तक यह इलाका वैज्ञानिकों की नजरों से दूर रहा, क्योंकि यहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। लेकिन साल 2017 में हुए एक फील्ड सर्वे ने इतिहास की दिशा ही बदल दी। वैज्ञानिकों को यहां एक अब लुप्त हो चुकी झील के किनारे मिट्टी में दबे हुए सात मानव पदचिह्न मिले (O...

Holy-day कैसे बना Holiday, जानिए छुट्टियों का इतिहास

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  History of holidays : छुट्टियां क्यों जरूरी हैं? holiday शब्द की उत्पत्ति, छुट्टियों का इतिहास, वीकेंड यानी शनिवार-रविवार की छुट्टी कैसे शुरू हुई - जानकारी uplive24.com पर। History of holidays : नया साल आते ही एक काम सबसे पहले शुरू होता है - कैलेंडर खोलकर लाल निशान ढूंढना। 'जनवरी में गणतंत्र दिवस... मार्च में होली... और हां, दशहरा और दिवाली कब पड़ रहे... साथ में कितना लंबा वीकेंड है?' सवाल ऐसे पूछे जाते हैं, मानो साल में सबसे जरूरी छुट्टियां ही हों। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छुट्टियों का कॉन्सेप्ट (History of holidays) आया कहां से? चलिए, इस कहानी को शुरुआत से समझते हैं। आज जिस शब्द Holiday का हम इस्तेमाल करते हैं, उसकी जड़ में है Holy Day यानी पवित्र दिन। शुरुआत में छुट्टियां आराम के लिए नहीं, धर्म और पूजा के लिए होती थीं। हजारों साल पहले इंसान मानता था कि कुछ दिन ऐसे होने चाहिए, जब काम बंद हो और भगवान को याद किया जाए। तब सार्वजनिक रूप से कुछ दिन होते थे, जब खेती, व्यापार, युद्ध - सभी पर ब्रेक लग जाता था। उस समय लोग केवल प्रार्थना करते। कह सकते हैं कि यह पूरी छुट्टी नहीं...

New Year history : 1 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं नया साल?

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  New Year history : नया साल क्यों और कब मनाया जाने लगा? 1 जनवरी की परंपरा, मेसोपोटामिया से रोम तक न्यू ईयर का पूरा इतिहास, कैलेंडर बदलाव और अलग-अलग सभ्यताओं में नए साल की रोचक कहानी पढ़ें uplive24.com पर। New Year history : आज पूरी दुनिया में नए साल का जश्न (New Year Celebrations) अलग-अलग रंगों और परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। कहीं आतिशबाजी से आसमान रोशन है, कहीं काउंटडाउन और म्यूजिक के साथ पार्टियां चल रही हैं, तो कहीं परिवार और दोस्तों के साथ शांत तरीके से नए साल का स्वागत हो रहा है। यह दिन सिर्फ तारीख बदलने का नहीं, बल्कि उम्मीद, नए संकल्प और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान ने पहली बार यह कब सोचा कि एक साल खत्म हुआ, अब नया शुरू होना चाहिए? क्या है नए साल का इतिहास (New Year history)? Career horoscope 2026 : सैलरी, प्रमोशन, पैसा – जानिए नए साल में कैसा होगा करियर राशिफल इस सवाल का जवाब हमें आधुनिक शहरों से नहीं, बल्कि मिट्टी, फसल और आसमान से मिलता है। इतिहासकार मानते हैं कि नया साल मनाने की परंपरा तब शुरू हुई जब इंसान ने खेती करना सीखा। ...