Holy-day कैसे बना Holiday, जानिए छुट्टियों का इतिहास

 

History of holidays : छुट्टियां क्यों जरूरी हैं? holiday शब्द की उत्पत्ति, छुट्टियों का इतिहास, वीकेंड यानी शनिवार-रविवार की छुट्टी कैसे शुरू हुई - जानकारी uplive24.com पर।

History of holidays : नया साल आते ही एक काम सबसे पहले शुरू होता है - कैलेंडर खोलकर लाल निशान ढूंढना। 'जनवरी में गणतंत्र दिवस... मार्च में होली... और हां, दशहरा और दिवाली कब पड़ रहे... साथ में कितना लंबा वीकेंड है?' सवाल ऐसे पूछे जाते हैं, मानो साल में सबसे जरूरी छुट्टियां ही हों।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छुट्टियों का कॉन्सेप्ट (History of holidays) आया कहां से? चलिए, इस कहानी को शुरुआत से समझते हैं।

आज जिस शब्द Holiday का हम इस्तेमाल करते हैं, उसकी जड़ में है Holy Day यानी पवित्र दिन। शुरुआत में छुट्टियां आराम के लिए नहीं, धर्म और पूजा के लिए होती थीं।

हजारों साल पहले इंसान मानता था कि कुछ दिन ऐसे होने चाहिए, जब काम बंद हो और भगवान को याद किया जाए। तब सार्वजनिक रूप से कुछ दिन होते थे, जब खेती, व्यापार, युद्ध - सभी पर ब्रेक लग जाता था। उस समय लोग केवल प्रार्थना करते। कह सकते हैं कि यह पूरी छुट्टी नहीं थी, क्योंकि काम की तरह ही आस्था का पालन करना पड़ता था (History of holidays)।

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रोमन साम्राज्य ने दी पहली असली वाली छुट्टी 

अब जरा रोम चलते हैं - प्राचीन रोमन साम्राज्य में। यहां Saturnalia नाम का एक त्योहार मनाया जाता था, जिसके लिए छुट्टी होती। ईसा पूर्व 5वीं-4वीं सदी से इस त्योहार के सबूत मिलते हैं। यह रोमन देवता Saturn (सैटर्न) को समर्पित था, जो कृषि, फसल और समृद्धि के देवता माने जाते थे।

Saturnalia हर साल 17 दिसंबर से शुरू होता था। पांच से सात दिनों तक लोग जश्न में डूबे रहते (History of holidays)। मानते हैं कि यह त्योहार अपने समय से बहुत आगे था, क्योंकि इसमें समाज के नियम उलट दिए जाते थे।

मालिक और गुलाम की भूमिकाएं बदल जाती थीं। दोनों साथ बैठकर खाना खाते। कई जगहों पर मालिक गुलामों की सेवा करते थे। लोग एक-दूसरे को छोटे-छोटे उपहार देते थे। यही परंपरा आगे चलकर Christmas gifts का आधार बनी।

इसमें सार्वजनिक दावतें होती थीं। शराब पीना, गाना-बजाना, जुआ खेलना आम बात थी। इस दौरान काम करना लगभग अपराध माना जाता था। सामाजिक नियमों से आजादी मिल जाती थी। लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनते (History of holidays)। 

अगर ये सब आपको आज के क्रिसमस जैसा लग रहा है, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। कई आधुनिक छुट्टियां दरअसल पगान परंपराओं से निकली हैं। पगान परंपराएं मतलब गैर-ईसाई धर्म की परंपराएं। 

क्रिसमस का रिश्ता भी Winter Solstice से जोड़ा जाता है, यानी सबसे लंबी रात के बाद रोशनी की वापसी का जश्न।

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फिर हुआ चर्च का नियंत्रण

मध्य युग आते-आते यूरोप में छुट्टियां पूरी तरह धार्मिक नियंत्रण में आ गईं। संतों के दिन, ईस्टर, चर्च उत्सव - इन दिनों काम करना पाप माना जाता था (History of holidays)।

लेकिन मजेदार बात यह है कि 17वीं सदी में इंग्लैंड के प्यूरिटन इतने सख्त हो गए कि उन्होंने क्रिसमस ही बैन कर दिया। उनका तर्क था कि जश्न मनाने से श्रद्धा कम होती है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स में भी एक समय क्रिसमस मनाने पर जुर्माना लगता था। तब छुट्टियां बंद हो गई थीं।

जब मजदूरों ने मांगा आराम

असल बदलाव आया औद्योगिक क्रांति के बाद। फैक्ट्रियों में 12–14 घंटे काम और किसी दिन कोई ब्रेक नहीं। ऐसा बहुत लंबे समय तक नहीं चल पाया। तब पहली बार समझ आया कि थका हुआ इंसान न तो अच्छा काम करता है, न ज्यादा जी पाता है। यहीं से छुट्टियां धार्मिक अधिकार नहीं, बल्कि मानव अधिकार बनने लगीं (History of holidays)।

19वीं सदी में अमेरिका और यूरोप में पहली बार सरकारी छुट्टियां और पेड लीव का कॉन्सेप्ट आया।

शनिवार-रविवार कैसे बने छुट्टी?

अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर। शुरुआत में लोग सप्ताह के सातों दिन काम करते थे। लेकिन धार्मिक कारणों से ईसाइयों के लिए रविवार और यहूदियों के लिए शनिवार का दिन तय हो गया।

इंडस्ट्रियल दौर में फैक्ट्री मालिकों ने समझौता किया कि शनिवार आधा दिन काम करना होगा और रविवार को पूरा आराम मिलेगा। धीरे-धीरे आधा शनिवार भी गायब हो गया (History of holidays) और इस तरह दो दिन का वीकेंड बना।

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1926 में हेनरी फोर्ड ने अपनी फैक्ट्रियों में दो दिन की छुट्टी लागू की। उनका मानना था कि कर्मचारी ज्यादा आराम करेंगे तो काम के दिनों में उनकी उत्पादकता बेहतर हो जाएगी। देखते-देखते पूरी दुनिया ने वीकेंड अपना लिया। 

आज कई देशों में चार दिनों के सप्ताह का कॉन्सेप्ट आया है। कई उद्योगों में हर हफ्ते दो दिनों की छुट्टी आम है (History of holidays)। ILO (इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन) कहता है कि हर देश में कम से कम 3 हफ्ते पेड लीव होनी चाहिए, लेकिन कई देश इससे ज्यादा देते हैं। 

कई रिसर्च भी साबित करती हैं कि छुट्टियां इंसान को रिस्टार्ट करती हैं। ये शरीर का रिफ्रेश बटन हैं। छुट्टियां हमें याद दिलाती हैं कि जिंदगी सिर्फ काम नहीं है।

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