Rai Stones Currency : टनों वजनी पत्थर थे इस देश की करेंसी, कैसे ले जाते थे लोग

 

माइक्रोनेशिया के यप द्वीप (Yap Island) की अनोखी मुद्रा Rai Stones Currency दुनिया की सबसे विचित्र करेंसी प्रणाली मानी जाती है। यहां बड़े-बड़े पत्थरों को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। uplive24.com पर जानिए कैसे ये पत्थर ब्लॉकचेन जैसी पुरानी आर्थिक सोच का प्रतीक बने और आज भी संस्कृति का हिस्सा हैं।

दुनिया में आपने सोना, चांदी, सिक्के या नोट जैसी मुद्राएं देखी होंगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा देश भी है, जहां कभी बड़े-बड़े पत्थर (Rai Stones Currency) मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होते थे?

यह कहानी है माइक्रोनेशिया (Micronesia) के एक छोटे से द्वीप यप (Yap Island) की, जहां पत्थरों की कीमत डॉलर या रुपये से कहीं ज्यादा मायने रखती थी। (Rai Stones Currency)

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माइक्रोनेशिया कहां है?

माइक्रोनेशिया (Federated States of Micronesia) प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा-सा द्वीप समूह है। यह अमेरिका के पश्चिम में और फिलीपींस के उत्तर-पूर्व में पड़ता है। चार मुख्य द्वीप समूहों - यप (Yap), चूक (Chuuk), पोह्नपेई (Pohnpei) और कोसराए (Kosrae) से मिलकर बना यह देश आज भी अपनी पारंपरिक संस्कृति और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध है।

यहीं पर Yap Island है, जहां Rai Stones Currency की अनोखी परंपरा जन्मी थी।

क्या हैं Rai Stones Currency?

Rai Stones या Stone Money of Yap विशाल गोल पत्थर होते हैं, जिनके बीच में एक छेद होता है। इन्हें चूना पत्थर से बनाया जाता था, और कभी-कभी इनका आकार 3-4 मीटर तक बड़ा होता था!

इन पत्थरों का वजन सैकड़ों किलो से लेकर कई टन तक होता था। जाहिर है, इन्हें जेब में तो नहीं रखा जा सकता था, लेकिन फिर भी ये उस दौर की मुद्रा थीं। (Rai Stones Currency)

कैसे बनी ये मुद्रा? (History of Rai Stones Currency)

दिलचस्प बात यह है कि Yap द्वीप पर ऐसा चूना पत्थर पाया ही नहीं जाता था। लोग इन्हें करीब 400 किलोमीटर दूर Palau द्वीप से नावों के जरिए लाते थे।

यह यात्रा बेहद कठिन और खतरनाक होती थी। कई नावें समुद्र में डूब जातीं, कई लोग लौट ही नहीं पाते थे। इसलिए, जो पत्थर सुरक्षित यप तक पहुंच जाते, उनकी कीमत और भी बढ़ जाती थी।

यहां Rai Stones की वैल्यू केवल उनके आकार से नहीं, बल्कि उनके इतिहास और यात्रा की कठिनाई से तय होती थी। जितना जोखिम, उतनी कीमत - यही इस पत्थर की असली Currency Value थी।

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कैसे होता था लेन-देन?

अब सवाल उठता है कि जब पत्थर इतने बड़े थे कि उन्हें हिलाना भी मुश्किल था, तो फिर लेन-देन कैसे होता था?

दरअसल, Rai Stones को अपनी जगह से हटाया नहीं जाता था। बस समुदाय के लोग तय कर लेते थे कि इसका मालिक कौन है।

मालिकाना हक का रिकॉर्ड मौखिक रूप में रखा जाता था, बिल्कुल वैसे ही जैसे आज ब्लॉकचेन (Blockchain) में लेन-देन दर्ज होता है।

अगर किसी ने शादी, जमीन या व्यापार में किसी को पत्थर ट्रांसफर किया, तो पूरा गांव इस बदलाव को स्वीकार कर लेता था और पत्थर वहीं पड़े-पड़े नई करेंसी बन जाता था।

किस काम में आती थी ये स्टोन मनी?

Rai Stones Currency का इस्तेमाल रोजमर्रा के बाजार में नहीं होता था। इन्हें बड़े मौकों के लिए रखा जाता था, जैसे शादी का दहेज, भूमि हस्तांतरण, राजनीतिक समझौते, या युद्ध समाप्ति के सौदे में।

कई बार किसी परिवार की संपन्नता इस बात से आंकी जाती थी कि उनके पास कितने Rai Stones हैं।

20वीं सदी की शुरुआत तक यह परंपरा चलती रही। लेकिन जब पश्चिमी दुनिया का प्रभाव बढ़ा, जापान और फिर अमेरिका का शासन आया, तो Rai Stones Currency धीरे-धीरे एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गई।

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अब यप द्वीप में ये पत्थर सिर्फ सम्मान, विरासत और इतिहास के प्रतीक हैं - ठीक वैसे ही जैसे पुराने सिक्के किसी संग्रहालय में रखे जाते हैं।

आज अर्थशास्त्री Rai Stones System को मानव इतिहास की सबसे रोचक मुद्रा प्रणाली मानते हैं। इसमें भरोसा, सामाजिक स्वीकार्यता और मूल्य का विश्वास - यही तीन स्तंभ थे।

कई विशेषज्ञ तो इसे Bitcoin और Blockchain Technology का आदिम रूप भी कहते हैं, क्योंकि दोनों ही प्रणालियां विश्वास पर चलती हैं, न कि किसी केंद्रीय बैंक पर।

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