यरूशलम का वह राजा, जिसने स्वर्ग के करीब बनाना चाहा महल

Herod palace history in hindi : हेरोद का पैलेस (Herodium) यरूशलम के पास बना वह रहस्यमयी महल है, जहां सत्ता, भय और इतिहास एक साथ मिलते हैं। uplive24.com पर जानिए राजा हेरोद महान की महत्वाकांक्षा और उसकी कब्रगाह की सच्ची कहानी।

Herod palace history in hindi : यरूशलम से कुछ मील दक्षिण की ओर, जूडियन रेगिस्तान की तपती पहाड़ियों के बीच एक पहाड़ी पर खामोश पड़ा है - हेरोद का पैलेस (Herodium)। दो हजार साल पहले यह महल केवल पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि एक राजा की महत्वाकांक्षा, भय और वैभव का प्रतीक था। 

यह वही जगह है जहां राजा हेरोद महान ने अपने शासन के चरम पर अपने लिए एक स्वर्ग जैसा महल बनवाया था, और अंततः यही उसका समाधिस्थल भी बना। (Herod palace history in hindi)

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सत्ता और संदेह का राजा

हेरोद महान ने 37 ईसा पूर्व से लेकर 4 ईसा पूर्व तक यहूदिया (Judea) पर शासन किया। वह रोमन साम्राज्य का सहयोगी राजा था, जिसे Caesar Augustus ने यहूदिया का किंग घोषित किया था। उसका शासन स्थापत्य कला, किलों और भव्य निर्माणों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन उतना ही उसके अत्याचार, संदेह और क्रूरता के लिए कुख्यात भी।

हेरोद अत्यंत बुद्धिमान शासक था, जिसने अपने राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया, यरूशलम के सेकंड टेम्पल (Second Temple) का पुनर्निर्माण कराया, बंदरगाह शहर Caesarea Maritima बसाया, और अपने साम्राज्य में शानदार सड़कों और किलों का जाल बिछाया। परंतु सत्ता के डर ने उसे निर्दयी बना दिया। उसने अपनी पत्नी मरियम्ने और अपने दो बेटों की हत्या करवाई, क्योंकि उसे डर था कि वे उसकी गद्दी छीन लेंगे।

हेरोद का पैलेस कब और क्यों बना? (Herod palace history in hindi)

Herodium का निर्माण लगभग 23–20 ईसा पूर्व के बीच हुआ था। हेरोद ने यह महल अपने नाम पर बनवाया था। इतिहास में यह पहला और एकमात्र स्थान है जो किसी यहूदी राजा के नाम पर रखा गया। कहा जाता है कि 40 ईसा पूर्व जब हेरोद अपने दुश्मनों से भाग रहा था, तो उसने इसी पहाड़ी के पास शरण ली थी। बाद में जब वह विजयी होकर लौटा, तो उसने निश्चय किया कि यहीं अपने गौरव की निशानी बनाएगा।

हेरोद का पैलेस वास्तव में स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण था। यह एक गोलाकार पहाड़ी पर बनाया गया था, जिसकी ऊंचाई कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई थी ताकि यह दूर से दिखाई दे। महल दो भागों में बंटा था।

ऊपरी किला पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, चार ऊंचे टावरों से घिरा हुआ। यहां राजा के निजी कक्ष, बाथ हाउस (स्नानागार), भोज कक्ष और सैनिक चौकियां थीं (Herod palace history in hindi)।

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दूसरा भाग था निचला महल। नीचे बाग-बगीचे, जलाशय, फव्वारे, और स्नानागार बनाए गए थे। कहा जाता है कि यहां पानी पहाड़ से पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता था - यह तकनीकी दृष्टि से उस समय के लिए अद्भुत था।

हेरोद चाहता था कि उसका महल आकाश और पृथ्वी के बीच झूलता हुआ प्रतीत हो, जहां से वह पूरे रेगिस्तान को निहार सके।

हेरोद का अंतिम समय और समाधि

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में हेरोद शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर पड़ गया था। बाइबिल के अनुसार, यीशु के जन्म की भविष्यवाणी सुनकर उसने बेथलहम में निर्दोष बच्चों की हत्या का आदेश दिया। यह घटना उसके नाम को अमर तो बना गई, लेकिन एक निर्दयी राजा के रूप में।

मृत्यु से पहले उसने आदेश दिया कि उसकी कब्र Herodium में ही बनाई जाए। उसने कहा था कि मेरे मरने के बाद भी मेरा नाम इन पहाड़ियों में गूंजता रहे। (Herod palace history in hindi)

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2007 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् Ehud Netzer ने यहां खुदाई के दौरान वही समाधि खोज निकाली, जिसमें लाल पत्थरों से सजा हुआ एक राजसी ताबूत मिला, जिसे अधिकांश इतिहासकार हेरोद की ही कब्र मानते हैं।

आज Herodium के खंडहर इजराइल के दक्षिण में, बेथलहम के पास एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में मौजूद हैं। यहां ऊंचाई पर बनी पत्थर की सीढ़ियां, गुफाएं, और पानी के टैंक अब भी उस युग की तकनीक और समृद्धि की कहानी कहते हैं। इजराइल सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय पार्क का दर्जा दिया है। दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं।

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