Surtsey Island : जब समुद्र के बीच अचानक जन्मा एक नया द्वीप, जो फिर पानी में समा जाएगा
1963 में आइसलैंड के पास समुद्र से उभरा था सर्टसी द्वीप। यह ज्वालामुखी से जन्मा द्वीप आज जीवन का प्रतीक है। uplive24.com पर जानिए Surtsey Island की अद्भुत कहानी।
Surtsey Island : नवंबर 1963 की एक ठंडी सुबह थी। आइसलैंड के दक्षिणी तट पर मछुआरों का एक दल अपनी नाव से जाल डालकर लौट रहा था। तभी उन्होंने देखा कि अटलांटिक महासागर के ऊपर आसमान में एक काला धुआं फैल गया है। पहले तो उन्हें लगा कोई जहाज जल रहा है, लेकिन रेडियो संपर्क में आने पर पता चला कि आसपास कोई संकट में नहीं है।
धीरे-धीरे नाव खुद ही बहने लगी। घबराकर रसोइए ने कप्तान को जगाया। सबको लगा मानो वे किसी भंवर में खिंच रहे हों। तभी दूरबीन से देखने पर रहस्य खुला - समुद्र के नीचे एक ज्वालामुखी फट रहा था!
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समुद्र की गहराइयों से निकला एक नया द्वीप
कुछ ही घंटों में आसमान राख से ढक गया। समुद्र की सतह पर एक काली रेखा उभरने लगी। अगले दिन वह दस मीटर ऊंची थी, फिर 40 मीटर। और देखते ही देखते, समुद्र के बीच एक नया द्वीप (Surtsey Island) जन्म ले चुका था।
दो महीने बाद वह चट्टान एक किलोमीटर से लंबी और 174 मीटर ऊंची हो गई। इसे नाम मिला - सर्टसी (Surtsey), नॉर्स मिथक के आग के दैत्य सर्टर के नाम पर।
पास के Vestmannaeyjar द्वीपों के लोग इस चमत्कार को अपनी आंखों से देख रहे थे। आसमान में बिजली गिर रही थी, समुद्र उबल रहा था और बीच में आग से भरा नया द्वीप जन्म ले रहा था। यह ज्वालामुखी दो साल तक लगातार फूटता रहा।
हर 3000 साल में होता है ऐसा चमत्कार
भूगोलविद बताते हैं कि ऐसे द्वीप बहुत दुर्लभ हैं। इस क्षेत्र में हर 3,000 से 5,000 साल में ही ऐसा होता है। ज्यादातर नए द्वीप कुछ ही समय में लहरों से मिट जाते हैं, पर सर्टसी (Surtsey Island) टिका रहा।
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प्रकृति की प्रयोगशाला बन गया सर्टसी (Surtsey Island)
सर्टसी (Surtsey Island) का जन्म वैज्ञानिकों के लिए एक वरदान साबित हुआ। यह एक ऐसा मौका था जब वे देख सकते थे कि धरती पर जीवन कैसे शुरू होता है, जब मनुष्य का कोई हस्तक्षेप न हो।
1965 में आइसलैंड सरकार ने Surtsey Island को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया। यहां न कोई पशु चर सकता था, न कोई पर्यटक जा सकता था। केवल वैज्ञानिकों को सीमित समय के लिए अनुमति थी।
उसी साल पहली बार वहां एक छोटा पौधा 'सी रॉकेट' दिखाई दिया, जो समुद्र की लहरों के साथ मुख्य भूमि से बहकर आया था।
जब पक्षियों ने बदली तस्वीर
शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा था कि पहले काई और शैवाल उगेंगे, फिर धीरे-धीरे पौधे। लेकिन कुछ ही वर्षों में वहां पक्षी आने लगे।
1980 के दशक में ब्लैक-बैक्ड गल नाम के पक्षी वहां घोंसले बनाने लगे। उनके मल में मौजूद बीजों ने पूरे द्वीप को हरा करना शुरू कर दिया।
डार्विन के समय से यह माना जाता था कि केवल रसीले फलों वाले पौधों के बीज ही पक्षी फैला सकते हैं। लेकिन सर्टसी (Surtsey Island) ने दिखाया कि यह धारणा गलत थी। यहां के ज्यादातर पौधों के बीज पक्षियों के मल से आए।
आज सर्टसी (Surtsey Island) पर ग्रे सील्स ने भी अपना ठिकाना बना लिया है। वे यहां आकर आराम करती हैं, बच्चे जन्म देती हैं और सुरक्षित रहती हैं क्योंकि पास ही शिकार पर निकले ऑर्का व्हेल्स तैरते हैं।
उनके मल-मूत्र और जन्म के अवशेषों से मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ रही है, जिससे पौधों की वृद्धि और तेज हो रही है।
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लेकिन एक दिन यह द्वीप भी मिट जाएगा
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जिस जगह सील रहती हैं, वहां की चट्टानें समुद्र के क्षरण से धीरे-धीरे घिस रही हैं। सदी के अंत तक सर्टसी (Surtsey Island) का एक बड़ा हिस्सा शायद लहरों में समा जाएगा।
लेकिन उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि उसने मानवता को एक गहरा सबक दिया है। सर्टसी (Surtsey Island) यह साबित करता है कि चाहे वातावरण कितना भी कठोर क्यों न हो, जीवन लौटने का रास्ता खोज ही लेता है।

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