2000 साल से रेगिस्तान में छिपा था शहर, एक यूरोपीय ने अरब बन खोजा

 

History of lost mysterious desert city Petra : स्विस खोजकर्ता जोहान लुडविग बर्कहार्ट ने 1812 में जॉर्डन की रेगिस्तान घाटियों में दफन प्राचीन पेट्रा शहर की खोज कर इतिहास बदल दिया। uplive24.com पर जानिए कैसे उन्होंने ‘शेख इब्राहिम’ बनकर नबातियन साम्राज्य की राजधानी तक पहुंचने का साहसिक सफर किया और दुनिया के सामने पेट्रा की खूबसूरती को उजागर किया।

History of lost mysterious desert city Petra : क्या आपने कभी यह सोचा है कि कोई दो हजार साल पुराना शहर पूरी दुनिया की नजरों से गायब हो जाए, और एक दिन अचानक किसी अनजान से यात्री की नजर उस पर पड़ जाए? 

यह किसी रोमांचक उपन्यास जैसा लगता है, लेकिन यह असली कहानी है जोहान लुडविग बर्कहार्ट की, उस स्विस खोजकर्ता की जिसने 1812 में जॉर्डन की बंजर पहाड़ियों के बीच छिपे प्राचीन शहर पेट्रा (History of lost mysterious desert city Petra) का राज दुनिया के सामने खोल दिया। 

1600 year old Roman wine factory : तुर्की के पहाड़ों में मिली सदियों पुरानी शराब फैक्ट्री

एक साधारण युवक से ‘शेख इब्राहिम’ बनने तक

जोहान लुडविग बर्कहार्ट का जन्म 1784 में स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में हुआ था। बचपन से ही उनमें किताबों से ज्यादा दिलचस्पी उन रास्तों की तरफ थी, जहां नक्शे खत्म हो जाते हैं। पढ़ाई में तेज और जिज्ञासा से भरे बर्कहार्ट ने इंग्लैंड पहुंचकर अफ्रीकन एसोसिएशन का सपना देखा, जो उस समय दुनिया के अनदेखे इलाकों की खोज में लगी थी। लेकिन अरब दुनिया में यूरोपियों का प्रवेश आसान नहीं था।

यहीं से शुरू हुआ उनका अद्भुत परिवर्तन। उन्होंने अपने आप को पूरी तरह एक अरब यात्री की तरह ढाल लिया। उन्होंने अरबी सीखी, इस्लामी रीति-रिवाज अपनाए, रेगिस्तानी कपड़े पहने और अपना नाम रखा शेख इब्राहिम इब्न अब्दुल्लाह। 

यह भूमिका इतनी असली लगी कि कोई संदेह नहीं कर सकता था कि वह एक यूरोपीय हैं। आगे के सात वर्षों तक वह मध्य पूर्व, सीरिया, मिस्र, नूबिया और अरब के रेगिस्तानों में घूमते रहे, लेकिन असली रोमांच उनका इंतजार कर रहा था - पेट्रा की खोज (Mysterious desert city Petra)।

Herod palace history in hindi : वह राजा जो स्वर्ग के करीब बनाना चाहता था महल, बाइबल में आया नाम

नबातियन साम्राज्य की गुम राजधानी

पेट्रा कोई साधारण शहर नहीं था। यह नबातियन सभ्यता का गौरव था - ऐसी अरब जनजाति जिसने ईसा से 300 वर्ष पहले व्यापार और वास्तुकला दोनों में कमाल कर दिखाया था। लाल बलुआ पत्थरों की ऊंची-ऊंची चट्टानों को काटकर बनाए गए चमकदार मंदिर, कब्रें, जल-प्रबंधन प्रणाली और महल इस साम्राज्य की शानदार इंजीनियरिंग का सबूत थे। (History of lost mysterious desert city Petra)

नबातियन लोग रोम और अरब के बीच चलने वाले मसाला व्यापार, लोबान, मुर्रा और रेशम के रास्तों पर पूरा नियंत्रण रखते थे। यही कारण था कि उनकी राजधानी पेट्रा व्यापार से अमीर बनती चली गई। लेकिन 7वीं सदी में जब व्यापार मार्ग बदल गए और भूकंपों ने शहर को हिला दिया, तो पेट्रा (History of lost mysterious desert city Petra) धीरे-धीरे रेत में खो गया। दुनिया को बस उसके किस्से ही सुनाई देते थे, और इसी किस्से ने बर्कहार्ट को खींचा।

वादी मूसा से पेट्रा (History of lost mysterious desert city Petra) तक

1812 में, जब बर्कहार्ट अफ्रीका जाने की तैयारी कर रहे थे, उन्होंने स्थानीय लोगों से पहली बार वादी मूसा का नाम सुना। लोग कहते थे कि वहां कहीं पहाड़ों के बीच प्राचीन खंडहर हैं, लेकिन विदेशी कभी वहां पहुंच न सके। 

बर्कहार्ट ने दिमाग लगाया। उन्होंने खुद को एक धार्मिक यात्री बताया, जो हजरत मूसा की कब्र पर कुर्बानी देना चाहता है। यह बहाना उन्हें पेट्रा के असली रास्तों तक ले जाने वाला साबित हुआ।

22 अगस्त 1812 का दिन था, बर्कहार्ट ने एक स्थानीय गाइड के साथ ऊंट पर सवार होकर सिक नामक संकरी घाटी में प्रवेश किया। यह घाटी इतनी पतली और घुमावदार थी कि लगता था जैसे पहाड़ अपने राज खोलने से डर रहा हो। लगभग 1.2 किलोमीटर की इस यात्रा के बाद जब घाटी ने अचानक एक खुला रास्ता दिखाया, तो उसके सामने उभरती हुई इमारत ने बर्कहार्ट की सांसें रोक दीं।

Mystery of The Tower of Jericho : 11000 साल पहले बाइबल की जमीन पर किसने खड़ा किया यह टावर?

वह था Al-Khazneh, यानी The Treasury। 40 मीटर ऊंची, गुलाबी चट्टान से तराशी गई यह इमारत मानो रेगिस्तान के दिल में छिपा हुआ कोई राजमहल हो। यह वही दृश्य है जिसे आज दुनिया फिल्मों, पोस्टरों और पर्यटन के आकर्षण के रूप में देखती है।

बर्कहार्ट ने उस पल को देखकर ही समझ लिया कि वह इतिहास के सबसे बड़े रहस्य पर ठोकर खा चुके हैं।

बर्कहार्ट की हिम्मत की असली कहानी

पेट्रा (History of lost mysterious desert city Petra) की खोज सिर्फ रोमांच नहीं थी, यह जोखिम भी था। बेदौइन कबीलों को विदेशियों पर शक होता था। गर्मी 50 डिग्री तक पहुंचती थी। पानी कम मिलता था। डाकुओं से हमला हो सकता था। 

बर्कहार्ट जानते थे कि जरा-सा भी शक हुआ तो जान जा सकती है। इसलिए उन्होंने वहां ज्यादा देर रुकने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने चुपचाप नोट्स बनाए, स्केच तैयार किए और वहां से निकल गए, लेकिन वह क्षण हमेशा के लिए दुनिया का इतिहास बदल चुका था।

जब दुनिया को पता चला पेट्रा का राज

बर्कहार्ट इंग्लैंड लौटे और अपनी यात्रा को लिखना शुरू किया। उनकी किताब 'Travels in Syria and the Holy Land' 1822 में प्रकाशित हुई और पहली बार यूरोपियों को पता चला कि रेगिस्तान के बीच एक अद्भुत शहर छिपा है। धीरे-धीरे विद्वान, पुरातत्वकार और यात्री वहां पहुंचे।

आज पेट्रा UNESCO World Heritage Site है, और दुनिया के New Seven Wonders of the World में शामिल है। इंडियाना जोन्स जैसी हॉलीवुड फिल्मों में इसका चमकता स्वरूप दुनिया देख चुकी है।

Rai Stones Currency : इस देश में टनों वजनी पत्थर के चलते थे सिक्के

दुर्भाग्य से बर्कहार्ट की जिंदगी लंबी नहीं रही। 1817 में कैरो में 33 वर्ष की उम्र में बीमारी से मृत्यु हो गई। लेकिन उन्होंने सिर्फ पेट्रा (History of lost mysterious desert city Petra) ही नहीं खोजा - उन्होंने नील नदी के स्रोतों की खोज, मक्का की यात्रा और अरब संस्कृति के दस्तावेज भी दुनिया को दिए। इतने छोटे जीवन में इतना बड़ा योगदान उन्हें खोज की दुनिया के सबसे सम्मानित नामों में शामिल करता है।

Comments

Popular posts from this blog

Act of War : जब ये शब्द बन जाते हैं युद्ध का ऐलान

Constitution : पाकिस्तान का संविधान बनाने वाला बाद में कैसे पछताया

Pahalgam attack : भारत की स्ट्राइक से डरे पाकिस्तान ने दी सफाई