चुड़ैल झाड़ू पर ही क्यों उड़ती है? जवाब एक पादरी के कबूलनामे में

History of witches : चुड़ैल झाड़ू पर उड़ती है... आपने भी यही सुना होगा। लेकिन दुनिया को यह पता कैसे चला कि चुड़ैलें झाड़ू पर ही उड़ती हैं? जादू से उन्होंने कुछ और क्यों नहीं उड़ाया? इसका जवाब इतिहास में छिपा है, 15वीं सदी के फ्रांसीसी पादरी Guillaume Edelin की कहानी में, जानिए uplive24.com पर। 

History of witches : कभी आपने सोचा है कि चुड़ैल झाड़ू पर उड़ती है - यह कल्पना आखिर आई कहां से? काली रात, आसमान में उड़ती एक औरत, और उसके नीचे चमकता झाड़ू - यह दृश्य आज फिल्मों, हैलोवीन और कहानियों में आम है। लेकिन इस विचार के पीछे एक वास्तविक व्यक्ति था, Guillaume Edelin, 15वीं सदी का एक फ्रांसीसी पादरी, जिसने खुद दावा किया था कि वह झाड़ू पर उड़ चुका है!

Guillaume Edelin फ्रांस के Saint-Germain-en-Laye नामक कस्बे में चर्च से जुड़ा हुआ एक पढ़ा-लिखा और सम्मानित पादरी था। वह धर्मोपदेश देता था, और कहा जाता है कि वह चुड़ैलों पर चलने वाले मुकदमों का विरोध करता था। 

उस समय यूरोप में चुड़ैलों को लेकर डर और अंधविश्वास चरम पर था। चर्च, अदालतें और आम जनता - सबको लगता था कि शैतान इंसानों के बीच घूम रहा है (History of witches)।

लेकिन विडंबना यह हुई कि Edelin को खुद ही चुड़ैलों का साथी होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। सन 1453 के आसपास, उसे पकड़ा गया और उसके ऊपर आरोप लगे कि वह शैतान की पूजा करता है और रात में झाड़ू पर उड़कर ‘Witches’ Sabbath’ में भाग लेता है - यानी वह रात जब चुड़ैलें कथित तौर पर एकत्र होकर शैतान के साथ जश्न मनाती हैं (History of witches)।

Witches’ Pond : ड्रैकुला के इस तालाब से आज भी क्यों डरते हैं लोग?

कबूलनामा जिसने इतिहास बदल दिया

Edelin को पकड़ने के बाद उससे पूछताछ की गई। उस दौर में टॉर्चर के जरिए कबूलनामे निकलवाए जाते थे। इतिहासकारों के अनुसार, यातना के बाद Edelin ने कबूल किया कि हां, वह झाड़ू पर उड़ता है। उसने कहा कि वह रात में झाड़ू पर बैठकर दूर पहाड़ियों में होने वाले शैतानी अनुष्ठानों में शामिल होता था (History of witches)।

यह बयान सिर्फ एक आदमी का इजहार नहीं था - यह वह क्षण था जिसने 'झाड़ू पर उड़ती चुड़ैल' की छवि को पहली बार लिखित इतिहास में दर्ज किया। Guillaume Edelin को पहला व्यक्ति माना जाता है जिसने सार्वजनिक रूप से झाड़ू पर उड़ने की बात स्वीकार की (History of witches)।

चुड़ैलों की छवि कैसे बनी?

Edelin के इस बयान के बाद यूरोप में चुड़ैलों की कहानियां तेजी से फैलने लगीं कि वे झाड़ू पर रात में उड़ती हैं। लोककथाओं, चर्च की कहानियों और डराने वाली प्रवचनों में झाड़ू उड़ान को चुड़ैल की पहचान बना दिया गया। इन कहानियों ने डर और सनसनी, दोनों को जन्म दिया।

धीरे-धीरे कलाकारों और चित्रकारों ने भी इन कहानियों को आकार दिया। 15वीं और 16वीं सदी की पेंटिंग्स में महिलाएं झाड़ू पर सवार दिखने लगीं। मध्ययुगीन यूरोप में यह माना गया कि चुड़ैलें जादुई मलहम लगाकर अपने शरीर को हल्का करती हैं और फिर झाड़ू की सहायता से उड़ सकती हैं (History of witches)।

लेकिन कई इतिहासकार यह भी कहते हैं कि इन मलहमों में hallucinogenic herbs यानी मतिभ्रम पैदा करने वाली जड़ी-बूटियां होती थीं, जिनसे उन्हें उड़ने का भ्रम होता था। यानी उड़ान असल में नहीं, दिमाग के अंदर थी, लेकिन समाज ने उसे वास्तविक मान लिया।

Jatan Nagar Palace : 100 कमरों का यह भव्य महल आज क्यों माना जाता है भुतहा?

क्या हुआ पादरी का?

Edelin के कबूलनामे के बाद उसे कठोर दंड दिया गया। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि उसे जेल में डाला गया, कुछ के अनुसार उसे फांसी दी गई। लेकिन उसके बाद जो हुआ, वह और भी गहरा था - उसकी कहानी ने आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। (History of witches)

15वीं से 17वीं सदी के बीच यूरोप में चुड़ैलों का शिकार(witch-hunts) शुरू हुआ। हजारों महिलाओं को इसी तरह के आरोपों में जिंदा जला दिया गया। और इन मुकदमों में अक्सर एक ही बात दोहराई जाती थी कि वे झाड़ू पर उड़ती हैं।

Edelin का नाम धीरे-धीरे भुला दिया गया, लेकिन कबूलनामा लोककथाओं का स्थायी हिस्सा बन गया।

Lake Nyos : जब झील से निकले बादलों ने 1,700 को मौत की नींद सुला दिया

लेकिन झाड़ू ही क्यों?

यह सवाल अब भी रोचक है कि आखिर झाड़ू ही क्यों चुना गया? कबूलनामे में कुछ और भी तो हो सकता था!

दरअसल, झाड़ू घर का सबसे आम उपकरण था, जो ज्यादातर महिलाओं के हाथ में होता था। उस दौर में जब महिलाएं घरेलू कामों से बाहर जादू या स्वतंत्रता की बातें करती थीं, समाज ने उन्हें 'चुड़ैल' कहना शुरू कर दिया। (History of witches)

इसलिए झाड़ू केवल एक वस्तु नहीं थी - वह महिला स्वतंत्रता, घरेलू सत्ता और समाज के डर का प्रतीक बन गई। और Guillaume Edelin की कहानी ने इस प्रतीक को उड़ान दे दी।

Comments

Popular posts from this blog

Act of War : जब ये शब्द बन जाते हैं युद्ध का ऐलान

Constitution : पाकिस्तान का संविधान बनाने वाला बाद में कैसे पछताया

Pahalgam attack : भारत की स्ट्राइक से डरे पाकिस्तान ने दी सफाई