मिस्र की कब्र में कैद थी मेथी, जानिए इस्तेमाल का सही तरीका
सभी जानते हैं कि मेथी सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे लिया कैसे जाए? uplive24.com पर जानिए कि मेथी को भिगोकर पीना सही है या उबालकर, कहां से आई मेथी, इतिहास और इसके फायदे।
Methi water benefits : भारतीय रसोई में मेथी (Fenugreek seeds) कोई नई चीज नहीं है। दाल-सब्जी से लेकर घरेलू नुस्खों तक, मेथी सदियों से हमारे खानपान और जीवनशैली का हिस्सा रही है। मेथी का पानी सुबह खाली पेट पीने के कई फायदे हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है कि मेथी को रातभर भिगोकर पिएं या उबालकर?
तब मेथी को भिगोना चाहिए
जब मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगो दिया जाता है, तो उनके पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में आ जाते हैं। सुबह इस पानी को पीने से पाचन बेहतर होता है, गैस और एसिडिटी में राहत मिलती है। यह वजन कंट्रोल करने में भी मदद करता है और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। स्वाद हल्का होता है, इसलिए इसे रोज पीना आसान रहता है। (Methi water benefits)
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जब चाहिए तेज असर
मेथी को पानी में उबालने से उसके सक्रिय तत्व ज्यादा मात्रा में निकलते हैं। यह तरीका शरीर को डिटॉक्स करने, सर्दी-खांसी और सूजन में राहत देने में मददगार हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल और दिल की सेहत के लिए भी इसे उपयोगी माना जाता है (Methi water benefits)। हालांकि इसका स्वाद कड़वा और असर थोड़ा तेज होता है, इसलिए हर दिन पीना सभी के लिए सही नहीं होता।
भिगोई और उबली मेथी में फर्क
भिगोई हुई मेथी का पानी हल्का होता है और पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता। वहीं उबली हुई मेथी का पानी ज्यादा ताकतवर होता है, लेकिन कुछ पोषक तत्व गर्मी में कम हो सकते हैं। आसान शब्दों में कहें तो रोजमर्रा के लिए भिगोई मेथी और खास जरूरत के लिए उबली मेथी बेहतर है।
अगर आप रोज सुबह एक आसान और हल्की आदत अपनाना चाहते हैं, तो भिगोई हुई मेथी का पानी बेहतर है। अगर किसी खास समस्या जैसे सर्दी, सूजन या डिटॉक्स की जरूरत हो, तो कुछ दिनों के लिए उबली मेथी का पानी लिया जा सकता है।
मेथी का पानी चाहे जिस रूप में पिएं, मात्रा सीमित रखें। एक गिलास काफी है। सही तरीके से लिया गया मेथी पानी शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलन में रखने में मदद कर सकता है।
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मिस्र की प्राचीन कब्र में मेथी
मेथी का वैज्ञानिक नाम Trigonella foenum-graecum है। यह दुनिया की सबसे पुरानी औषधीय फसलों में से एक मानी जाती है। इसके सबसे पुराने बीज इराक के टेल हलाल साइट से मिले हैं, जो कार्बन डेटिंग से लगभग 4000 ईसा पूर्व (यानी करीब 6000 साल पुराने) के हैं।
मिस्र के फरो तूतनखामुन की कब्र से भी सूखे मेथी के बीज मिले हैं, जो बताते हैं कि प्राचीन मिस्र में इसका इस्तेमाल दवा, ममी बनाने और धूप में होता था। मेथी की उत्पत्ति मेडिटेरेनियन क्षेत्र, पश्चिमी एशिया और मध्य पूर्व में हुई है। यह भारत की मूल फसल नहीं है, बल्कि व्यापार और प्राचीन सभ्यताओं के माध्यम से भारत आई।
लगभग 2000 ईसा पूर्व हड़प्पा सभ्यता में इसके प्रमाण मिले हैं, यानी भारत में यह हजारों सालों से उगाई और इस्तेमाल की जा रही है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा मेथी उत्पादक देश है, खासकर राजस्थान में। प्राचीन यूनान, रोम और आयुर्वेद में भी मेथी को दवा और मसाले के रूप में महत्व दिया गया (Methi water benefits)।

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