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क्या भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में आज भी धड़कता है श्रीकृष्ण का दिल?

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  भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां हर 12 साल में क्यों बदली जाती हैं, क्या है ब्रह्म पदार्थ, क्यों नहीं सुनाई देती समुद्र की आवाज और क्यों खास है मंदिर की रसोई? जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रहस्यों के बारे में जानिए uplive24.com पर। ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है। हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन यह मंदिर केवल रथयात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण भी प्रसिद्ध है। मूर्तियों के बदलने की परंपरा से लेकर रहस्यमयी 'ब्रह्म पदार्थ', समुद्र की आवाज और दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में से एक तक, जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं (Jagannath Puri Temple mysteries)। श्रीराम के जन्म पर क्या कहता है इतिहास? रथयात्रा की शुरुआत कैसे हुई? धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने नगर भ्रमण की इच्छा जताई। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बड़े भाई बलभद्र उन्हें ...

जब भारतीय फुटबॉल से डरने लगा था यूरोप

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Golden Era of Indian Football : आज भारतीयों की जुबान पर मेसी और रोनाल्डो हैं। लोगों ने विदेशी टीमों में से अपनी टीमें चुन रखी हैं। लेकिन एक समय भारतीय फुटबॉल टीम सबकी चहेती थी। uplive24.com पर स्पेशल रिपोर्ट। Golden Era of Indian Football : जब भी फुटबॉल विश्व कप शुरू होता है, तो भारत में यह सवाल उठने लगता है कि हमारी टीम क्यों नहीं? कब तक अर्जेंटीना या ब्राजील में भारतीय अपनी टीम और पसंदीदा खिलाड़ी चुनते रहेंगे? हालांकि एक वक्त देश फुटबॉल की बड़ी उभरती ताकत था। बहुत कम लोग जानते हैं कि तब भारतीय फुटबॉल टीम को एशिया की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता था। भारत को एशियाई फुटबॉल का ब्राजील तक कहा जाने लगा था। आज यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि भारत ने 1951 और 1962 के एशियाई खेलों में फुटबॉल का स्वर्ण पदक जीता था। 1951 में दिल्ली में भारत ने फाइनल में ईरान को हराया, जबकि 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों में दक्षिण कोरिया को मात देकर दूसरा गोल्ड अपने नाम किया (Golden Era of Indian Football)। 1962 के टूर्नामेंट में भारत ने जापान जैसी मजबूत टीम को भी हराया था। आज यही जापान, दक्षिण कोरिया और ईरान लगात...

जब फुटबॉल ने करा दी दो देशों में जंग

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  1969 में फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर के दौरान अल साल्वाडोर और होंडुरास के बीच खेला गया फुटबॉल मैच इतिहास की सबसे चर्चित जंग का कारण बना। जानिए 100 घंटे के फुटबॉल वॉर की पूरी कहानी uplive24.com पर। History of football war : बात जब फुटबॉल के लिए दीवानगी की हो, तो इसकी कोई हद नहीं। लेकिन यह जुनून कभी-कभी इतना खतरनाक भी हो सकता है कि देशों के रिश्ते तक टूट जाएं। इतिहास में एक ऐसी ही घटना दर्ज है, जब एक फुटबॉल मैच के बाद दो पड़ोसी देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। यह संघर्ष 'फुटबॉल वॉर' या '100 घंटे की जंग' के नाम से जाना जाता है (History of football war)। यह युद्ध जुलाई 1969 में मध्य अमेरिकी देशों अल साल्वाडोर (El Salvador) और होंडुरास (Honduras) के बीच हुआ था। क्या ट्रंप के कहने पर काम कर रहा फीफा? क्या सचमुच फुटबॉल मैच की वजह से हुआ था युद्ध? इतिहासकार मानते हैं कि युद्ध की असली वजह केवल फुटबॉल नहीं थी। दोनों देशों के बीच वर्षों से भूमि विवाद, आव्रजन और आर्थिक असमानता को लेकर तनाव चल रहा था। फुटबॉल मैच वह चिंगारी साबित हुआ जिसने पहले से सुलग रहे विवाद को खुली जंग में बदल दिया ...

इस तरह खोजा गया केप वर्डे और फिर बना गुलामों का सबसे बड़ा केंद्र

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फीफा फुटबॉल विश्व कप (Fifa World Cup) में केप वर्डे ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। इसके पहले कई लोगों ने इस देश का नाम तक नहीं सुना था। uplive24.com पर जानिए इस देश का इतिहास। History of Cape Verde : अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच बसा केप वर्डे आज अफ्रीका के सबसे शांत, स्थिर और लोकतांत्रिक देशों में गिना जाता है। लेकिन इस छोटे से द्वीपीय देश की कहानी संघर्ष, गुलामी, अकाल, उपनिवेशवाद और आजादी के लंबे सफर से होकर गुजरती है। कभी यह द्वीप ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार का बड़ा केंद्र था। यहां राजनीतिक कैदियों को निर्वासित किया जाता था और धार्मिक उत्पीड़न से भागे लोगों को शरण भी मिलती थी।  इतिहासकारों के अनुसार 1456 में जब पुर्तगाली नाविक यहां पहुंचे तो उन्होंने इन द्वीपों को पूरी तरह निर्जन बताया। अब तक ऐसा कोई पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि यहां पहले कोई मानव बस्ती थी (History of Cape Verde)। उस समय पुर्तगाल नई समुद्री व्यापारिक राहों की तलाश में था। यूरोप से भारत और पश्चिमी अफ्रीका तक पहुंचने के लिए उसे नया समुद्री मार्ग चाहिए था, क्योंकि मसालों, सोने और...

क्या यीशू को सूली पर चढ़ाते समय भूकंप आया था?

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  जीसस को जब सूली पर चढ़ाया गया, तब येरुशलम की धरती कांप उठी थी। बाइबिल में इस घटना का जिक्र मिलता है। इतिहासकारों ने रिसर्च के आधार पर क्या नतीजा निकाला है, uplive24.com पर जानिए। Was there earthquake when Jesus died : यीशु मसीह की सूली पर चढ़ाए जाने की घटना इतिहास और आस्था के बीच खड़ी एक ऐसी कहानी है, जिस पर सदियों से बहस होती रही है। खासकर येरुशलम में उस दिन भूकंप आने का दावा इसे और रहस्यमयी बना देता है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ धार्मिक वर्णन है या इसके पीछे कोई वास्तविक प्राकृतिक घटना भी छिपी हो सकती है? New Testament के अनुसार, जब यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया और उन्होंने अंतिम सांस ली, तो अचानक धरती कांप उठी। इस घटना का सबसे स्पष्ट वर्णन Gospel of Matthew में मिलता है, जहां लिखा है कि धरती हिली, चट्टानें टूट गईं और मंदिर का पर्दा फट गया। यह दृश्य इतना असाधारण बताया गया कि इसे केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक दिव्य संकेत की तरह प्रस्तुत किया गया (Was there earthquake when Jesus died)।  दिलचस्प बात यह है कि अन्य सुसमाचारों जैसे Gospel of Mark, Gospel of Luke और Gospe...

किचन वेस्ट से घर में ऐसे बनाएं कम्पोस्ट खाद

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How to make compost from kitchen waste : किचन से निकले वेस्ट यानी फल-सब्जियों के छीलके, सूखे पत्तों, बचे हुए खराब हो चुके खराब भोजन से भी टेरेस गार्डेन के लिए खाद तैयार की जा सकती है। uplive24.com पर जानिए घर में कम्पोस्ट बनाने का तरीका। How to make compost from kitchen waste : आज दुनिया भर में खाने की भारी बर्बादी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार हर साल अरबों टन भोजन कूड़े में फेंक दिया जाता है। यह केवल भोजन की बर्बादी नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। जब खाने का कचरा लैंडफिल में पहुंचता है, तो वहां ऑक्सीजन की कमी के कारण यह सड़ने लगता है और मीथेन गैस पैदा करता है। यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कई गुना अधिक खतरनाक मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इस समस्या का एक बड़ा समाधान हमारे अपने घरों में छिपा हुआ है। किचन से निकलने वाले फल और सब्जियों के छिलके, चायपत्ती, कॉफी ग्राउंड्स और अन्य जैविक कचरे को फेंकने के बजाय खाद में बदला जा सकता है। यही प्रक्रिया होम कम्पोस्टिंग (Home Composting) कहलाती है। यह भी पढ़ें : Gardening Tips : गर्मी...

आबादी बढ़ाने के लिए पैसे क्यों दे रहीं सरकारें?

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  आंध्र प्रदेश में घटती जन्मदर से सरकार चिंतित है। uplive24.com पर जानिए क्यों दुनिया के कई देश कम बच्चे पैदा होने की समस्या से जूझ रहे हैं और चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी कैसे उसके लिए बड़ी चुनौती बन गई। एक समय था जब दुनिया के कई देश बढ़ती आबादी से परेशान थे। सरकारें लोगों से कम बच्चे पैदा करने की अपील करती थीं। भारत में भी 'हम दो, हमारे दो' जैसे अभियान चलाए गए। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया के कई देश घटती जन्मदर और बूढ़ी होती आबादी से चिंतित हैं। भारत के कुछ राज्य भी अब इसी समस्या का सामना करने लगे हैं। इसी चिंता के बीच आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने में तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर आर्थिक प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है। सरकार तीसरे बच्चे पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने की तैयारी कर रही है। यह फैसला सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक कारणों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है (Why governments giving money to increase population)। UP Live News Mansoon Kab Aayega : यह बढ़ती गर्मी मानसून के लिए क्यों अच्छी है? आखिर क्यों घट रही है जन...

गर्मियों में क्यों फट पड़ता है AC?

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  AC Bast Reasons In Summer : गर्मियों में AC ब्लास्ट और आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। uplive24.com पर जानिए कि इसकी वजह क्या है और गर्मियों में एसी को किस तरह सही रखा जाए। AC Bast Reasons In Summer : गर्मी ने अभी रंग दिखाना शुरू ही किया है और AC ब्लास्ट और आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। पिछले साल भी कई जगह AC में आग लगने से बड़े हादसे हुए थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि AC ब्लास्ट अचानक नहीं होते, बल्कि लंबे समय तक की गई लापरवाही का नतीजा होते हैं। गलत इंस्टॉलेशन, खराब वायरिंग, समय पर सर्विसिंग न कराना और लगातार ओवरलोड इस्तेमाल जैसी वजहें एयर कंडीशनर को खतरनाक बना सकती हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इन हादसों से काफी हद तक बचा जा सकता है। Why Mobile Heat : क्यों गर्म होता है मोबाइल, कैसे करें ठंडा? गर्मियों में AC ब्लास्ट की सबसे बड़ी वजहें (AC Bast Reasons In Summer) इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और शॉर्ट सर्किट : AC में आग लगने या ब्लास्ट की सबसे आम वजह खराब वायरिंग और शॉर्ट सर्किट होती है। ढीले वायर, ओवरलोडेड सर्किट या पुरानी इलेक्ट्रिक फिटिंग सिस्टम के अंदर अत्यधिक...

क्या चूना और नमक वाली बर्फ से कूलर AC जैसा ठंडा होता है?

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  सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे दावे वायरल होते हैं कि अगर कूलर की टंकी पर चूना लगा दिया जाए या उसमें नमक वाले पानी की बर्फ डाल दी जाए, तो कूलर AC जैसी ठंडी हवा देने लगता है। लेकिन क्या यह सच है या सिर्फ इंटरनेट पर फैले लाखों फर्जी दावों में से एक (Cooler vs AC fact)? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन तरीकों में कितना दम है और कूलर को सही मायनों में ज्यादा ठंडा कैसे किया जा सकता है। क्या चूना और बर्फ से कूलर ज्यादा ठंडा होता है? सीधा जवाब है हां, थोड़ी बहुत ठंडक बढ़ सकती है, लेकिन कूलर कभी AC जैसी ठंडी हवा नहीं देगा। इन उपायों के पीछे थोड़ा विज्ञान जरूर है, लेकिन असर सीमित और अस्थायी होता है (Cooler vs AC fact)। How to fix slow mobile phone easily : फोन स्लो हो गया है? ये काम कीजिए टंकी पर चूना लगाने से क्या फायदा होता है? अगर कूलर की बाहरी बॉडी या टंकी पर सफेद चूना या सफेद पेंट लगाया जाए, तो वह धूप की गर्मी कम सोखता है। सफेद रंग सूरज की किरणों को ज्यादा परावर्तित करता है, इसलिए कूलर कम गर्म होता है। इसका फायदा यह हो सकता है धूप में रखा कूलर कम गर्म होगा, टंकी का पानी जल्दी गर्म नहीं हो...

Who are Houthis : क्या है हूतियों का इतिहास

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  Who are Houthis : मध्य पूर्व की राजनीति में हूती नाम बार-बार सुनाई पड़ता है - हूती। कभी यमन के एक स्थानीय विद्रोही समूह के रूप में उभरे ये लोग आज वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने वाली ताकत बन चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर हूती हैं कौन, कैसे इतने शक्तिशाली बने और क्यों पूरी दुनिया इन पर नजर रखे हुए है, जवाब uplive24.com पर? हूती दरअसल यमन के जैदी शिया मुस्लिम समुदाय से जुड़े एक सशस्त्र और राजनीतिक समूह हैं। इनकी जड़ें 1990 के दशक के अंत में पड़ीं, लेकिन 2000 के आसपास इन्हें असली समर्थन मिलना शुरू हुआ। उस समय यमन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कमजोर शासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ रहा था। इसी माहौल में हूती एक विरोध आंदोलन से धीरे-धीरे सैन्य ताकत में बदल गए (Who are Houthis)। Saudi Arabia wants more attacks on iran : ईरान के खिलाफ ट्रंप को उकसाने वाला कौन है? जब हूती ने राजधानी पर कब्जा किया हूती आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ साल 2014 में आया, जब उन्होंने यमन की राजधानी सना (Sana’a) पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में उन्होंने पश्चिम समर्थित राष्ट्रपति अबद-रब्बू...

गैस सिलेंडर या इंडक्शन, किस पर खाना बनाना सस्ता?

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  पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG सिलेंडर महंगे हो रहे हैं। ऐसे में क्या इंडक्शन पर खाना बनाना सस्ता है? uplive24.com पर जानिए LPG और इंडक्शन कुकिंग का पूरा खर्च और तुलना। LPG vs induction cooking cost : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की रसोई तक महसूस होने लगा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में आई बाधाओं के कारण कई शहरों में LPG की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। कुछ जगहों पर रेस्टोरेंट्स को अपना मेनू सीमित करना पड़ा है, जबकि कई घरों में लोग खाना बनाने के दूसरे विकल्पों पर विचार करने लगे हैं।  ऐसे माहौल में एक सवाल बार-बार सामने आ रहा है, क्या मौजूदा हालात में गैस सिलेंडर पर खाना बनाना सस्ता है या इंडक्शन का इस्तेमाल ज्यादा किफायती पड़ता है (LPG vs induction cooking cost)? भारत अपनी घरेलू रसोई गैस का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए जब भी वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल होती है, उसका असर सीधे देश में गैस की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण समुद्री शिपिंग मार्गों पर दबाव बढ़ा है और ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी गई है।  Jay Shah slammed P...

क्या है फितरा, जकात और सदका?

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रमजान में तीन शब्द ज्यादा सुनाई देते हैं - फितरा, जकात और सदका। रमजान में इनकी बड़ी अहमियत है। जानते हैं कि ये तीनों हैं क्या? क्या होता है फितरा? इसका पूरा नाम सदका-ए-फित्र है। इसे आम जबान में फितरा या फितराना भी कहा जाता है। इसकी व्यवस्था इसलिए बनाई गई, ताकि गरीब भी ईद मना सकें। इसी वजह से ईद से पहले फितरा अदा किया जाता है। पैगंबर मोहम्मद ने फरमाया कि हर किसी पर फितरा वाजिब है। ईद की नमाज होने से पहले इसे हर हाल में अदा करना जरूरी है। (Ramzan me Fitra Zakat aur sadka) ईद के बाद फितरे का कोई मतलब नहीं होता। जब त्योहार बीत गया, तब गरीब फितरा लेकर क्या करेंगे। इस्लाम के मुताबिक, फितरे पर पहला हक गरीब रिश्तेदार का है। उसके बाद आस-पास के गरीब लोगों का और फिर बाहर के लोगों का।  Alevi Muslim in Turkey : नमाज न रमजान, फिर भी मुसलमान, कौन हैं अलेवी? यह समझना भी जरूरी है कि कितना फितरा अदा करना चाहिए। कहते हैं कि पैगंबर मोहम्मद ने जितना फितरा अदा किया था, आज उसी की कैलकुलेशन के हिसाब से लोग फितरा अदा करते है। उन्होंने एक स्वा खजूर, किशमिश, गेहूं या जौ अदा की थी। स्वा मापने का एक तरीका था, ...

जोड़ियां क्या वाकई ऊपर से बनकर आती हैं?

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valentines day Love Marriage Astrology : क्या आपकी कुंडली में लव मैरिज योग है? uplive24.com पर जानें प्रेम विवाह के लिए कौन-से ग्रह जिम्मेदार होते हैं, पंचम और सप्तम भाव का क्या महत्व है और ज्योतिष के अनुसार प्रेम सफल होगा या नहीं। जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती हैं! जिससे संयोग होगा, उससे रिश्ता जुड़ ही जाएगा! बचपन से हम यह सुनते आए हैं, लेकिन क्या सच में शादी पहले से तय होती है? क्या कुंडली देखकर यह जाना जा सकता है कि आपकी शादी लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज? और अगर प्रेम होगा, तो कैसा होगा - सच्चा, निस्वार्थ या सिर्फ आकर्षण? ज्योतिष शास्त्र दावा करता है कि इन सवालों के जवाब जाने जा सकते हैं। बशर्ते ज्योतिष विद्या का गहरा जानकार आपकी कुंडली जानता हो। प्यार मोहब्बत जैसे मामलों पर से भी पर्दा उठा सकता है ज्योतिष शास्त्र (valentines day Love Marriage Astrology)।  किसी की कुंडली के जरिए उसके वर्तमान ही नहीं, बल्कि भूत और भविष्य के बारे में भी जाना जा सकता है। सिर्फ उस व्यक्ति के जन्म स्थान, जन्म तिथि और जन्म के समय का पता होना चाहिए। यह जानकारी जितनी सटीक होगी, उतनी ही सटीक होगी भविष्यवाण...

कभी 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाते थे, फिर गणतंत्र दिवस कैसे बना?

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  Republic Day history : भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया, लेकिन लागू 26 जनवरी 1950 को हुआ। uplive24.com पर जानिए 26 जनवरी की तारीख क्यों चुनी गई, पूर्ण स्वराज संकल्प और 1930 के स्वाधीनता दिवस का इतिहास। Republic Day history : भारत का संविधान बनने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे। संविधान सभा ने इसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया, लेकिन इसे लागू करने के लिए देश ने करीब दो महीने इंतजार किया। सवाल उठता है कि जब संविधान तैयार हो चुका था, तो फिर 26 जनवरी 1950 को ही लागू क्यों किया गया? इसका जवाब भारत के उस इतिहास में छिपा है, जहां 26 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के संकल्प और राष्ट्रीय आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुकी थी। यही वजह है कि भारत का स्वतंत्रता दिवस आगे चलकर गणतंत्र दिवस में बदल गया। Republic Day Wishes : हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिंदुस्तान की शान का है… गणतंत्र दिवस के शुभकामना संदेश संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया, लेकिन लागू 26 जनवरी 1950 को क्यों हुआ (Republic Day history)? जब संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को स्वीकार किया, तब देश के...

अमेरिकियों से इतने अलग क्यों दिखते हैं लैटिन अमेरिका के लोग?

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  Why Latin Americans look different : लैटिन अमेरिका के साथ अमेरिका फिर टकराव के रास्ते पर चल पड़ा है। एक ही महाद्वीप में होने के बावजूद दोनों दो दूर दुनिया के हिस्से लगते हैं। इस अंतर की वजह जानिए uplive24.com पर।  Why Latin Americans look different : जब भी अमेरिका और लैटिन अमेरिका की चर्चा होती है, तो एक सवाल बार-बार उभरता है - एक ही महाद्वीप में रहने वाले लोग इतने अलग क्यों दिखते हैं? उनकी भाषा अलग क्यों है, संस्कृति अलग क्यों है और सबसे अहम, अमेरिका के साथ उनके रिश्तों में हमेशा तनाव क्यों रहता है? इस सवाल का जवाब सिर्फ रंग-रूप या चेहरे-मोहरे में नहीं छिपा है। इसकी जड़ें इतिहास, उपनिवेशवाद, नस्लीय संरचना और अमेरिका की विदेश नीति में गहराई तक फैली हुई हैं। वेनेजुएला संकट हो, क्यूबा से दशकों पुरानी तनातनी हो या ब्राजील के साथ बढ़ता रणनीतिक तनाव - हर घटना इसी बड़े फ्रेम का हिस्सा है (Why Latin Americans look different)। History of Diego Garcia : अमेरिका-ब्रिटेन के लालच में जब एक द्वीप से उसके लोग छीन लिए गए उपनिवेशवाद ने दो अलग-अलग अमेरिका बनाए आज जिसे हम संयुक्त राज्य अमेरिक...

Diego Garcia के साथ इतिहास की नाइंसाफी

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  History of Diego Garcia : ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का गुस्सा अब Diego Garcia पर उतर रहा है। हिंद महासागर में मौजूद इस द्वीप का इतिहास क्या है? क्यों है अमेरिका की इसमें दिलचस्पी और ब्रिटेन का क्या है लेना-देना, जानिए uplive24.com पर। History of Diego Garcia : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक बयानबाजी की आग अब हिंद महासागर तक पहुंच गई है। ट्रंप ने अचानक ब्रिटेन पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि वह Diego Garcia द्वीप को मॉरिशस को क्यों लौटा रहा है, जबकि वहां अमेरिका का एक अहम सैन्य अड्डा मौजूद है। ट्रंप ने इसे ब्रिटेन की कमजोरी बताया और दावा किया कि चीन और रूस इस पर नजर रखे हुए हैं।  यहीं से Diego Garcia एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। लेकिन यह द्वीप सिर्फ एक सैन्य ठिकाना नहीं है। इसके पीछे उपनिवेशवाद, विस्थापन, टूटी जिंदगियां और भूली-बिसरी संस्कृतियों की एक लंबी और दर्दनाक कहानी छिपी हुई है (History of Diego Garcia)। ‘Tomorrow Island’ और ‘Yesterday Island’, जहां पैदल चल कर सकते हैं टाइम ट्रैवल एक द्वीप, जो कभी घर हुआ करता था (His...